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    मध्य पूर्व के बदले समीकरण : इजरायल-खाड़ी देशों की गुप्त बैठक, ईरान और हूती खतरे पर बनी रणनीति

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल और कई अरब देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की एक गुप्त बैठक ने क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मनी में हुई इस बैठक में इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर के साथ सऊदी अरब, कतर, मिस्र, बहरीन समेत कई अरब देशों के सैन्य प्रमुख शामिल हुए। बैठक में ईरान से जुड़े खतरे और यमन के हूती विद्रोहियों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर चर्चा हुई।

    जर्मनी में हुई गुप्त बैठक

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर की मेजबानी में हुई इस बैठक को सार्वजनिक नहीं किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें इजरायल, सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद थे। बैठक का प्रमुख एजेंडा ईरान से पैदा हो रहे क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे और उससे जुड़े मिसाइल एवं ड्रोन हमलों से निपटने की रणनीति बताया गया है।

    इस बैठक की अहमियत इसलिए भी है क्योंकि इसमें ऐसे देशों के सैन्य अधिकारी एक साथ बैठे, जिनके इजरायल के साथ रिश्ते अलग-अलग स्तर पर रहे हैं। खासतौर पर कतर और सऊदी अरब के साथ इजरायल के संबंध संवेदनशील रहे हैं। हालांकि, क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर सैन्य स्तर की बातचीत पहले भी सामने आ चुकी है।

    ईरान और हूती बने बड़ी चिंता

    मध्य पूर्व में ईरान से जुड़े खतरे के साथ-साथ यमन के हूती संगठन की गतिविधियां भी अरब देशों के लिए चिंता बढ़ा रही हैं। हाल के दिनों में हूती हमलों का दबाव सऊदी अरब तक पहुंचा है। सऊदी नेतृत्व का कहना है कि उसके इलाके और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को ड्रोन और मिसाइल हमलों से खतरा पैदा हुआ है।

    सऊदी अरब ने हाल में हूती ड्रोन को मक्का के दक्षिण में मार गिराने की भी जानकारी दी है। इसके बाद रियाद ने हूती गतिविधियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। हूती संगठन ईरान के साथ जुड़ा हुआ माना जाता है, हालांकि तेहरान और हूतियों के संबंधों की प्रकृति को लेकर अलग-अलग आकलन मौजूद हैं।

    इजरायल से सुरक्षा सहयोग का संकेत?

    रिपोर्टों में कहा गया है कि बदलते सुरक्षा हालात ने इजरायल और कुछ अरब देशों के बीच व्यावहारिक सैन्य संपर्क की जरूरत बढ़ाई है। खासकर खुफिया जानकारी, ड्रोन और मिसाइल हमलों से बचाव तथा समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे मुद्दे साझा चिंता बन गए हैं। हालांकि, बैठक को इजरायल और इन सभी देशों के बीच औपचारिक सैन्य गठबंधन या राजनयिक संबंधों में किसी बड़े बदलाव के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।

    क्षेत्र में हॉर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा है। हूती गतिविधियों के कारण लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।

    बदल रहे हैं मध्य पूर्व के समीकरण

    गुप्त बैठक की खबर ऐसे समय सामने आई है जब ईरान, इजरायल, अमेरिका और अरब देशों के बीच सुरक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अरब देशों के लिए एक ओर ईरान और उसके सहयोगी संगठनों से सुरक्षा चुनौती है, तो दूसरी ओर वे क्षेत्रीय संघर्ष को और फैलने से रोकना चाहते हैं।

    ऐसे में जर्मनी में हुई सैन्य बैठक को क्षेत्रीय देशों के बीच साझा सुरक्षा चिंताओं पर बढ़ते समन्वय के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि बैठक में लिए गए किसी औपचारिक सैन्य फैसले या संयुक्त अभियान की सार्वजनिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

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