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    जिस देश में कभी सूरज नहीं डूबता था, उस ब्रिटेन के टूटने की चर्चाएं, जानें 800 साल का इतिहास?

    ब्रिटेन यानी यूनाइटेड किंगडम (UK) के भविष्य को लेकर इन दिनों नई बहस छिड़ी है। 14 सितंबर 2026 को स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड के नेताओं ने कार्डिफ में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर संवैधानिक बदलाव और अपने भविष्य का फैसला खुद करने के अधिकार की मांग की। यह पहली बार है जब ब्रिटेन के इन तीन हिस्सों के राष्ट्रवादी नेतृत्व ने एक साथ ऐसी पहल की है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि यूके तुरंत टूटने जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड एक देश में आए कैसे? इसके पीछे करीब आठ सदियों में फैला युद्ध, राजशाही, सत्ता संघर्ष और राजनीतिक समझौतों का इतिहास है।

    “जिस देश में कभी सूरज नहीं डूबता था” वाली मशहूर कहावत

    ब्रिटिश साम्राज्य के इतने बड़े भूभाग पर शासन था कि किसी न किसी ब्रिटिश उपनिवेश में हमेशा दिन का समय रहता था। ब्रिटेन के अधीन एशिया, अफ्रीका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ओशिनिया के विशाल क्षेत्र थे। 19वीं और 20वीं सदी के शुरुआती दौर में ब्रिटिश साम्राज्य अपने चरम पर था। 1920 के आसपास इसका क्षेत्रफल लगभग 3.5 करोड़ वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया था और दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी पर ब्रिटिश शासन या नियंत्रण था। भारत ब्रिटिश साम्राज्य का सबसे महत्वपूर्ण उपनिवेशों में से एक था। इसी वजह से ब्रिटेन को कभी-कभी “दुनिया का सबसे बड़ा साम्राज्य” कहा जाता था।

    शुरुआत इंग्लैंड और वेल्स से

    आज के UK की कहानी समझने के लिए सबसे पहले इंग्लैंड और वेल्स को देखना होगा। मध्यकाल में वेल्स अलग-अलग स्थानीय रियासतों में बंटा हुआ था और इंग्लैंड के राजाओं के साथ लगातार संघर्ष होता था। 13वीं सदी में इंग्लैंड के राजा एडवर्ड प्रथम ने वेल्स पर सैन्य अभियान चलाए और अंततः वहां अंग्रेजी सत्ता स्थापित हुई।

    इसके बाद 1536 और 1542 के Acts of Union के जरिए वेल्स को इंग्लैंड की राजनीतिक और कानूनी व्यवस्था में शामिल कर लिया गया। वेल्स को इंग्लैंड की संसद में प्रतिनिधित्व मिला, जबकि वहां अंग्रेजी कानून और प्रशासनिक व्यवस्था लागू हुई।

    1603 में इंग्लैंड-स्कॉटलैंड का राजा एक हुआ

    स्कॉटलैंड का इतिहास कुछ अलग रहा। इंग्लैंड और स्कॉटलैंड लंबे समय तक अलग-अलग राज्य थे और इनके बीच युद्ध भी होते रहे। 1603 में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम की मृत्यु के बाद स्कॉटलैंड के राजा जेम्स VI इंग्लैंड के राजा जेम्स I भी बने। इसे Union of the Crowns कहा गया।

    लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि दोनों देश उस समय एक देश नहीं बने थे। उनके अलग-अलग संसद, कानून और प्रशासन मौजूद रहे।

    फिर 1707 में बड़ा राजनीतिक बदलाव आया। Acts of Union के जरिए इंग्लैंड और स्कॉटलैंड की संसदों का विलय हुआ और ग्रेट ब्रिटेन नाम का नया राजनीतिक संघ बना। 1 मई 1707 से संयुक्त संसद ने काम करना शुरू किया।

    आयरलैंड कैसे जुड़ा?

    इसके बाद ब्रिटिश द्वीपों की राजनीति में आयरलैंड सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बना। 1800 के Acts of Union के बाद 1 जनवरी 1801 से ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड मिलकर United Kingdom of Great Britain and Ireland बने।

    लेकिन यह एकीकरण भी स्थायी नहीं रहा। आयरलैंड में ब्रिटिश शासन के खिलाफ लंबे समय तक राष्ट्रवादी आंदोलन और संघर्ष चला। 20वीं सदी की शुरुआत में आयरलैंड का बड़ा हिस्सा ब्रिटेन से अलग होकर स्वतंत्र आयरिश राज्य बना। ब्रिटेन में मुख्य रूप से Northern Ireland रह गया। इसके बाद देश का आधिकारिक स्वरूप United Kingdom of Great Britain and Northern Ireland हो गया।

    फिर आया आज का दौर

    समय के साथ स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड को अपनी-अपनी संसद या विधानसभा के जरिए कुछ हद तक स्वायत्त शासन मिला। लेकिन विदेश नीति, रक्षा और कई प्रमुख संवैधानिक मामलों की शक्ति लंदन स्थित Westminster संसद के पास रही।

    अब इसी व्यवस्था को लेकर फिर बहस तेज है। स्कॉटलैंड में 2014 में स्वतंत्रता पर जनमत संग्रह हो चुका है, जिसमें करीब 55% मतदाताओं ने UK में बने रहने के पक्ष में वोट दिया था। अब स्कॉटिश राष्ट्रवादी फिर से जनमत संग्रह की मांग कर रहे हैं।

    वहीं नॉर्दर्न आयरलैंड की स्थिति अलग है। 1998 के Good Friday Agreement के तहत वहां आयरलैंड के साथ एकीकरण पर जनमत संग्रह की संवैधानिक व्यवस्था मौजूद है, लेकिन इसके लिए निर्धारित राजनीतिक और जनमत संबंधी परिस्थितियां पूरी होना जरूरी है।

    क्या सच में टूटने वाला है UK?

    फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। स्कॉटलैंड और वेल्स के लिए अलग होने का कोई स्वतः लागू होने वाला संवैधानिक रास्ता नहीं है और Westminster की भूमिका महत्वपूर्ण है। नॉर्दर्न आयरलैंड के मामले में अलग कानूनी व्यवस्था है।

    इसलिए 2026 का MoU ब्रिटेन के तत्काल विघटन की घोषणा नहीं, बल्कि संवैधानिक बदलाव और आत्मनिर्णय की राजनीतिक मांग को साझा रूप से उठाने की कोशिश है। करीब 800 साल में युद्ध, सत्ता और समझौतों से बना यह संघ अब लोकतांत्रिक राजनीति, पहचान और स्वायत्तता की नई बहस से गुजर रहा है।

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