More
    HomeHindi NewsDelhi NewsBRICS देश बोले-टैरिफ पर मनमानी नहीं चलेगी, WTO नियम मानने होंगे, अमेरिका...

    BRICS देश बोले-टैरिफ पर मनमानी नहीं चलेगी, WTO नियम मानने होंगे, अमेरिका का नाम लिए बिना निशाना

    भारत की अध्यक्षता में दिल्ली में हुए 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में वैश्विक व्यापार को लेकर सदस्य देशों ने एकजुट रुख अपनाया। नई दिल्ली घोषणा में BRICS देशों ने एकतरफा तरीके से लगाए जा रहे टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापारिक बाधाओं पर गंभीर चिंता जताई। हालांकि घोषणा में किसी देश का नाम लेकर निशाना नहीं साधा गया, लेकिन यह संदेश ऐसे समय आया है जब अमेरिका की टैरिफ नीतियों को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस तेज है। BRICS ने साफ कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप चलना चाहिए।

    एकतरफा टैरिफ पर BRICS की आपत्ति

    नई दिल्ली घोषणा में BRICS नेताओं ने कहा कि व्यापार और वित्त से जुड़े उपायों को एकतरफा तरीके से लागू करने से वैश्विक व्यापार व्यवस्था प्रभावित होती है। खासतौर पर ऊंचे टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं से व्यापार का प्रवाह बाधित होता है और अनिश्चितता बढ़ती है। समूह ने ऐसे कदमों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए नियम आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।

    BRICS का कहना है कि संरक्षणवादी नीतियां केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि उनका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। आयात शुल्क बढ़ने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है, आपूर्ति शृंखलाएं प्रभावित हो सकती हैं और विकासशील देशों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

    WTO के नियमों पर जोर

    घोषणा में WTO को वैश्विक व्यापार व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए इसके व्यापक सुधार की जरूरत पर भी बल दिया गया। BRICS देशों ने पारदर्शी, निष्पक्ष और भेदभाव रहित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के समर्थन की बात कही। समूह का जोर इस बात पर है कि व्यापार से जुड़े फैसले अंतरराष्ट्रीय नियमों और बहुपक्षीय सहमति के आधार पर हों, न कि किसी एक देश की नीतिगत प्राथमिकताओं के मुताबिक।

    यह रुख विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए खास महत्व रखता है। BRICS देशों का मानना है कि वैश्विक व्यापार नियमों में विकासशील देशों के हितों और उनकी आर्थिक परिस्थितियों को पर्याप्त महत्व मिलना चाहिए।

    अमेरिका का नाम लिए बिना निशाना

    दिलचस्प बात यह है कि नई दिल्ली घोषणा में अमेरिका का सीधे नाम नहीं लिया गया। इसके बावजूद एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों को लेकर जताई गई चिंता को व्यापक तौर पर अमेरिकी व्यापार नीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। अमेरिका की ओर से विभिन्न देशों पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क ने पहले ही वैश्विक व्यापार और निवेश को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है।

    BRICS का यह संदेश ऐसे वक्त आया है जब समूह वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारत भी लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि BRICS किसी देश के खिलाफ गठबंधन नहीं है, बल्कि ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने वाला मंच है।

    भारत का संतुलित रुख

    इस पूरे मामले में भारत की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली ने BRICS को पश्चिम विरोधी मंच बनाने के बजाय आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय सुधारों पर केंद्रित रखने की कोशिश की है। नई दिल्ली घोषणा में व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सप्लाई चेन और विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई।

    भारत के लिए यह संतुलन इसलिए भी अहम है क्योंकि एक तरफ वह अमेरिका के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंध मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस, चीन और अन्य BRICS देशों के साथ भी उसके महत्वपूर्ण हित जुड़े हैं।

    डॉलर और स्थानीय मुद्राओं पर भी चर्चा

    BRICS देशों ने वैश्विक व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और सदस्य देशों की भुगतान प्रणालियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। हालांकि सम्मेलन में किसी साझा BRICS मुद्रा की घोषणा नहीं की गई। इसके बजाय मौजूदा वित्तीय ढांचे के भीतर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश को बढ़ाने जैसे व्यावहारिक कदमों पर जोर रहा।

    वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बदलाव की मांग

    नई दिल्ली घोषणा का व्यापक संदेश यही है कि BRICS वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में ज्यादा प्रतिनिधित्व और नियम आधारित व्यापार चाहता है। समूह ने WTO, IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता भी रेखांकित की है।

    इस तरह दिल्ली से निकला BRICS का संदेश सिर्फ टैरिफ तक सीमित नहीं है। यह वैश्विक व्यापार व्यवस्था में शक्ति संतुलन बदलने और विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने की मांग भी है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि BRICS की यह साझा आवाज वैश्विक व्यापार नीति और अमेरिका समेत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ उसके संबंधों को किस दिशा में ले जाती है।

    RELATED ARTICLES

    Most Popular

    Recent Comments