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    ‘घमासान’ : अरशद वारसी और प्रतीक गांधी का मुकाबला, जानें फिल्म कहां हो रही स्ट्रीम

    तिग्मांशु धूलिया की फिल्म ‘घमासान’ आखिरकार दर्शकों के बीच पहुंच गई है। लंबे इंतजार के बाद यह फिल्म 11 सितंबर 2026 को ZEE5 पर रिलीज हुई है। फिल्म में प्रतीक गांधी और अरशद वारसी आमने-सामने हैं। एक तरफ कानून का प्रतिनिधित्व करता पुलिस अफसर है, तो दूसरी तरफ बुंदेलखंड की धरती पर खौफ का दूसरा नाम बन चुका डकैत। फिल्म की कहानी अपराध, सत्ता, पुलिस और न्याय के बीच चलने वाली जंग को दिखाती है। ZEE5 के मुताबिक फिल्म की अवधि करीब 2 घंटे 22 मिनट है और इसमें इशिता दत्ता व राजपाल यादव भी अहम भूमिकाओं में हैं।

    क्या है फिल्म की कहानी?

    ‘घमासान’ की कहानी बुंदेलखंड की पृष्ठभूमि में रची गई है। प्रतीक गांधी ने IPS अधिकारी आदित्य सिंह का किरदार निभाया है, जो एक खूंखार डकैत महाराज को पकड़ने के मिशन पर है। महाराज का किरदार अरशद वारसी ने निभाया है। यह सिर्फ पुलिस और डकैत के बीच पीछा करने की कहानी नहीं है, बल्कि दोनों के जरिए सत्ता, प्रभाव और व्यवस्था के अलग-अलग चेहरों को सामने लाने की कोशिश की गई है।

    फिल्म का आधार वास्तविक डकैत ददुआ से प्रेरित बताया गया है। यही वजह है कि तिग्मांशु धूलिया ने कहानी में बुंदेलखंड के माहौल और वहां की सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों को प्रमुखता देने की कोशिश की है।

    अरशद वारसी की एक्टिंग सबसे बड़ा प्लस

    फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी अरशद वारसी हैं। उन्हें आमतौर पर कॉमेडी और हल्के-फुल्के किरदारों के लिए ज्यादा याद किया जाता है, लेकिन यहां उनका अंदाज पूरी तरह अलग है। महाराज के किरदार में वह डर, चालाकी और अनिश्चितता को प्रभावी ढंग से सामने लाते हैं।

    खास बात यह है कि तिग्मांशु धूलिया ने अरशद को खलनायक के रूप में चुनकर एक दिलचस्प कास्टिंग की। निर्देशक के मुताबिक वह ‘सेहर’ में अरशद के काम से प्रभावित थे और उन्हें लगा कि अभिनेता इस तरह के किरदार को अलग ऊर्जा दे सकते हैं।

    प्रतीक गांधी भी नहीं पड़े पीछे

    प्रतीक गांधी ने IPS अधिकारी आदित्य सिंह के किरदार को गंभीरता के साथ निभाया है। उनके किरदार में पुलिस अफसर की दृढ़ता के साथ-साथ व्यवस्था के भीतर काम करने की मजबूरियां भी दिखाई देती हैं। अरशद के सामने उनका अभिनय फिल्म को जरूरी टकराव देता है।

    दोनों कलाकारों के बीच आमने-सामने के दृश्य फिल्म को गति देते हैं। हालांकि कई जगह कहानी इन शानदार अदाकारों की क्षमता का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाती।

    निर्देशन अच्छा, लेकिन कहानी कमजोर कड़ी

    तिग्मांशु धूलिया की फिल्मों में यथार्थवादी माहौल, जमीन से जुड़े किरदार और अपराध की दुनिया को करीब से दिखाने की खासियत रही है। ‘घमासान’ में भी उनका यह अंदाज नजर आता है। बुंदेलखंड का माहौल और किरदारों की भाषा फिल्म को विश्वसनीय बनाने में मदद करते हैं।

    लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी कहानी और पटकथा के स्तर पर महसूस होती है। कुछ हिस्सों में घटनाक्रम अपेक्षित दिशा में जाता दिखाई देता है और रोमांच लगातार एक जैसा नहीं रह पाता। जिन दो कलाकारों से फिल्म सबसे ज्यादा उम्मीद जगाती है, उनके किरदारों के बीच संघर्ष को और गहराई दी जा सकती थी।

    क्यों देखें?

    अगर आपको रियलिस्टिक क्राइम ड्रामा, डकैतों की कहानियां और दमदार अभिनय पसंद है, तो ‘घमासान’ एक बार देखने लायक फिल्म है। खासकर अरशद वारसी को एक गंभीर और खतरनाक भूमिका में देखना दिलचस्प अनुभव है। प्रतीक गांधी भी अपने हिस्से की भूमिका मजबूती से निभाते हैं।

    कुल मिलाकर ‘घमासान’ में एक्टिंग और माहौल मजबूत है, लेकिन कहानी उस स्तर तक नहीं पहुंचती जिसकी उम्मीद तिग्मांशु धूलिया, अरशद वारसी और प्रतीक गांधी जैसे नामों से होती है। कलाकारों का प्रदर्शन फिल्म को संभाल लेता है, मगर पटकथा थोड़ी और कसावट मांगती थी। फिल्म 11 सितंबर से ZEE5 पर स्ट्रीम हो रही है।

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