नई दिल्ली में हो रहे BRICS शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई बड़े नेता पहुंचे हैं। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल हैं। इन नेताओं की सुरक्षा केवल जमीन पर तैनात सुरक्षाकर्मियों तक सीमित नहीं है। उनके साथ आने वाली विशेष कारें और विमान भी अत्याधुनिक सुरक्षा व्यवस्था से लैस होते हैं। यही वजह है कि पुतिन की कार को ‘चलता-फिरता किला’ और उनके विमान को ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ यानी उड़ता हुआ क्रेमलिन कहा जाता है।
पुतिन की कार में क्या है खास?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के काफिले में Aurus Senat की बख्तरबंद लिमोजिन खास आकर्षण का केंद्र रहती है। यह सामान्य लग्जरी कार जैसी दिखाई देती है, लेकिन इसका सुरक्षा ढांचा बेहद मजबूत है। इसमें बुलेट और विस्फोट से बचाव के लिए विशेष आर्मर, मजबूत बॉडी और सुरक्षा तकनीकें इस्तेमाल की जाती हैं। इसके टायर भी इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि नुकसान होने की स्थिति में वाहन को आगे बढ़ाया जा सके।
यानी बाहर से यह कार भले ही राष्ट्रपति की आलीशान सवारी लगे, लेकिन असल में इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका सुरक्षा कवच है। इसी वजह से ऐसी कारों को आम तौर पर ‘मोबाइल बंकर’ या ‘चलता-फिरता किला’ कहा जाता है।
शी जिनपिंग की कार भी कम नहीं
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आधिकारिक सवारी Hongqi N701 भी बेहद सुरक्षित और खास तौर पर तैयार की गई कार मानी जाती है। इसकी कई तकनीकी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जातीं। यही गोपनीयता इसकी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में इन नेताओं के अपने सुरक्षा दल भी सक्रिय रहते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक पुतिन और जिनपिंग के लिए भारत में अलग-अलग होटल और विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। दोनों देशों के सुरक्षा अधिकारी और उनके उपकरण भी पहले से भारत पहुंच चुके थे।
पुतिन का विमान क्यों है ‘उड़ता हुआ क्रेमलिन’?
पुतिन जिस विमान से भारत पहुंचे, वह Ilyushin Il-96-300PU है। ‘PU’ रूसी शब्दावली में कमांड पोस्ट को दर्शाता है। यह सामान्य यात्री विमान का साधारण संस्करण नहीं, बल्कि रूसी राष्ट्रपति के लिए व्यापक रूप से संशोधित विमान है। इसमें सुरक्षित संचार और कमांड से जुड़ी विशेष प्रणालियां मौजूद हैं।
इसका मतलब यह है कि विमान का काम सिर्फ राष्ट्रपति को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना नहीं है। इसे ऐसी परिस्थितियों के लिए भी तैयार किया गया है, जहां राष्ट्रपति को सुरक्षित रहते हुए सरकार और सैन्य नेतृत्व के साथ संपर्क बनाए रखना पड़े। इसी कारण इसे ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ कहा जाता है।
साथ में दूसरा विमान क्यों?
पुतिन की यात्राओं के दौरान एक से ज्यादा विमानों की मौजूदगी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हो सकती है। ऐसे मामलों में मुख्य उद्देश्य संभावित हमले या निगरानी को मुश्किल बनाना होता है। दूसरे विमान की मौजूदगी से यह पहचानना कठिन हो सकता है कि राष्ट्रपति वास्तव में किस विमान में हैं। हालांकि, हर उड़ान में इस्तेमाल होने वाली पूरी रणनीति और विमान की सटीक भूमिका सार्वजनिक नहीं की जाती।
इस तरह जमीन पर बख्तरबंद कारों से लेकर आसमान में विशेष विमान तक, दुनिया के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले राष्ट्राध्यक्षों की यात्राओं में सुरक्षा की कई परतें होती हैं। BRICS सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग की मौजूदगी ने इस हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।


