नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ को एक सप्ताह से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन तिब्बत में लापता लोगों के परिवारों की बेचैनी कम नहीं हुई है। परिजनों का आरोप है कि उन्हें चीन की ओर से पर्याप्त और स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। ऐसे में वे सोशल मीडिया, नेपाल में मौजूद अधिकारियों और विदेशी दूतावासों के जरिए अपने प्रियजनों की खबर जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
26 अगस्त को आई इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल और चीन के सीमावर्ती हिमालयी इलाकों में भारी तबाही मचाई। नेपाल में मृतकों और लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ती रही, जबकि तिब्बत की ओर से सामने आने वाली जानकारी काफी सीमित रही। शुक्रवार तक नेपाल में करीब 4,800 लोग लापता बताए गए थे। चीन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार तिब्बत की तरफ 541 लोग अब भी लापता हैं। इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। चीन ने गुरुवार तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि की थी।
पति की तलाश में भटक रही फैन होंग
सिचुआन प्रांत की 31 वर्षीय फैन होंग की कहानी इस संकट की गंभीरता बताती है। उनके पति लिन बो नेपाल में एक चीनी हाईवे परियोजना से जुड़े थे। आपदा की सुबह दोनों की आखिरी बार बातचीत हुई थी। इसके बाद उनका कोई संपर्क नहीं हो सका।
लिन बो 2024 से स्याफ्रुबेसी-रसुवागढ़ी हाईवे की मरम्मत परियोजना में काम कर रहे थे। यह मार्ग नेपाल को तिब्बत के ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग के जरिए चीन से जोड़ता है। फैन होंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडनोट पर पति की तलाश के लिए पोस्ट किया, जिसे हजारों लोगों ने देखा और उस पर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं आईं। उनका कहना है कि अधिकारियों से संपर्क की कोशिश के बावजूद उन्हें कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई।
परिजन चाहते हैं कि प्रभावित इलाकों में ड्रोन या हेलीकॉप्टर के जरिए भी तलाश की जाए। उनका कहना है कि निर्माण स्थल तक बचाव अभियान की प्रगति को लेकर भी पर्याप्त जानकारी नहीं मिल रही है।
चीन के आंकड़ों पर क्यों उठ रहे सवाल?
तिब्बत से जुड़े संगठनों ने चीन के आधिकारिक आंकड़ों और सूचना व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में तबाही का स्तर व्यापक नजर आता है, जबकि आधिकारिक तौर पर मौतों की संख्या काफी कम बताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 30 अगस्त को तिब्बती पुलिस ने ऑनलाइन आपदा के पैमाने को लेकर कथित तौर पर गलत जानकारी फैलाने के आरोप में 10 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इससे सूचना की पारदर्शिता को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
विदेशी परिवार भी परेशान
लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। ब्रिटिश नागरिक श्रीधर अव्वारी, उनकी पत्नी दीप्ति और 14 वर्षीय बेटे अभिनव के भी 26 अगस्त को ग्यिरोंग के इमिग्रेशन क्षेत्र के पास लापता होने की खबर है। परिवार के रिश्तेदारों का कहना है कि उन्हें चीन की तरफ से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली और वे ऑनलाइन माध्यमों से बचाव तथा राहत अभियान की जानकारी जुटा रहे हैं।
चीनी अधिकारियों का कहना है कि मुख्य आपदा क्षेत्र तक सड़क संपर्क बहाल हो गया है और खोज एवं बचाव अभियान जारी है। लेकिन लापता लोगों के परिजनों के लिए सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है—उनके अपने कहां हैं और उनकी स्थिति क्या है? जानकारी के अभाव में हर गुजरता दिन परिवारों की चिंता और उम्मीद, दोनों को और गहरा कर रहा है।


