श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के इतिहास में पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद बनाया है। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को चुना गया है। मिश्रा वही अधिकारी हैं, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड की कमान संभाली थी।
करीब चार दशक का शानदार सैन्य करियर
जितेंद्र मिश्रा का भारतीय वायुसेना में करीब 38-39 साल का लंबा करियर रहा है। वह अनुभवी फाइटर पायलट रहे और अपने कार्यकाल में कई अहम परिचालन तथा कमान संबंधी जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने 18 से अधिक तरह के फाइटर, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाए। वह टेस्ट पायलट भी रहे और बेंगलुरु स्थित Aircraft and Systems Testing Establishment में चीफ टेस्ट पायलट की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
मिश्रा ने कई महत्वपूर्ण एयरबेस की कमान संभालने के अलावा डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशंस) जैसे वरिष्ठ पद पर भी काम किया। वह कारगिल युद्ध के अनुभवी अधिकारी भी बताए जाते हैं। वायुसेना में उनका कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हुआ और वह सेवानिवृत्त हुए।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान थी बड़ी जिम्मेदारी
जितेंद्र मिश्रा को सबसे ज्यादा पहचान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिली। उन्होंने 1 जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C) का पद संभाला था। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। उस समय पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय वायुसेना की परिचालन कमान मिश्रा के हाथों में थी।
इस अभियान में उनकी भूमिका को उनके सैन्य करियर के अहम अध्यायों में गिना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया।
अब राम मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी
वायुसेना से रिटायरमेंट के कुछ ही महीनों बाद मिश्रा को अब राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। CEO के तौर पर उनके सामने मंदिर के बढ़ते संचालन, प्रशासन, प्रबंधन और अनुपालन व्यवस्था को व्यवस्थित करने की चुनौती होगी। ट्रस्ट में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन को लेकर जोर दिया जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें अपनी नियुक्ति की जानकारी समाचार रिपोर्टों से मिली और उस समय तक ट्रस्ट की ओर से उन्हें औपचारिक सूचना नहीं मिली थी।
इस नियुक्ति के साथ अब एक सैन्य रणनीतिकार का अनुभव राम मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन में इस्तेमाल होगा। ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी मोर्चे की कमान संभाल चुके जितेंद्र मिश्रा के लिए यह सैन्य जीवन के बाद बिल्कुल अलग, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।


