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PM मोदी प्रभाव का इस्तेमाल कर खत्म कराएं युद्ध, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने लगाई गुहार

पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से युद्ध समाप्त कराने और शांति बहाल करने में मदद की गुहार लगाई है। 31 अगस्त 2026 को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से इतर दोनों नेताओं के बीच एक द्विपक्षीय बैठक हुई।

शांति की अपील और भारत का वैश्विक प्रभाव

ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, बैठक के दौरान राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने पश्चिमी देशों और अमेरिका की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान शुरुआत से ही बातचीत से मुद्दों को हल करने के पक्ष में रहा है। उन्होंने कहा, “युद्ध किसी के भी हित में नहीं है—न हमारे, न इस क्षेत्र के और न ही मानवता के। लेकिन अमेरिका ने कूटनीति के बजाय सैन्य ताकत और दबाव का रास्ता चुना है।”

पेजेश्कियान ने भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव, निष्पक्ष रुख और विभिन्न देशों के साथ उसके मजबूत राजनयिक संबंधों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी से अपील की कि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि भारत सभी संबंधित पक्षों को युद्ध व हिंसा के रास्ते से हटाकर पुनः संवाद और समझौते के मेज पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भारत का रुख: कूटनीति और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्र में जारी हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भारत के रुख को दोहराया कि किसी भी विवाद का समाधान युद्ध से नहीं, बल्कि कूटनीति और निरंतर बातचीत से ही संभव है।

बैठक में पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और निर्बाध व्यापार का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और आसपास के समुद्री मार्गों पर वाणिज्यिक जहाजों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर किसी भी तरह के हमले को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

व्यापारिक और द्विपक्षीय संबंध

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों ने चाबहार पोर्ट परियोजना के विकास और आपसी व्यापार के दायरे को बढ़ाने व विविधता लाने (diversify) पर भी सहमति जताई। भारत ने स्पष्ट किया कि वह क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में हर संभव प्रयास का समर्थन करता रहेगा।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पश्चिमी एशिया का संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Energy Supply Chain) के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

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