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नेपाल में 579 से अधिक लोगों की मौत, 1900 से ज्यादा लापता, विदेशी मदद लेने को तैयार हुई बालेन सरकार

नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। हिमालयी क्षेत्र में आई इस जलप्रलय ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल में अब तक 579 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 1900 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में नेपाल के अलावा करीब 30 देशों के नागरिक शामिल हैं।

इस बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार ने विदेशी सहायता को लेकर अपना रुख नरम किया है। शुरुआती दौर में नेपाल ने विदेशी खोज और बचाव दलों की मदद लेने से इनकार किया था और राहत अभियान को अपने संसाधनों से संचालित करने की बात कही थी। अब आपदा की भयावहता और तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग स्वीकार करने का फैसला किया है।

हालांकि, नेपाल को सामान्य खोज और बचाव दलों से ज्यादा विशेषज्ञ तकनीकी सहायता की जरूरत है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, देश को सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने, ध्वस्त पुलों के कारण बाधित परिवहन और संचार व्यवस्था बहाल करने, शवों की पहचान, डीएनए जांच और शवों को सुरक्षित रखने जैसे कामों में विदेशी विशेषज्ञता की आवश्यकता है।

त्रिशूली और भोटेकोशी क्षेत्र में बढ़ा खतरा

बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान को लगातार प्राकृतिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और नए जलस्रोतों के बनने से राहत दलों के लिए प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। भोटेकोशी क्षेत्र में पानी बढ़ने के बाद रसुवा जिले के प्रशासन ने कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकने का आदेश दिया था और लोगों तथा बचाव दलों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई।

त्रिशूली नदी क्षेत्र भी इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित है। यहां बाढ़ और मलबे के कारण सड़कें तथा अन्य संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैं। इससे कई इलाकों में राहत पहुंचाना चुनौती बना हुआ है।

सैकड़ों भारतीय भी प्रभावित

नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के प्रयास भी जारी हैं। अमर उजाला के अनुसार, 85 भारतीय पर्यटकों को बचाया गया है, जबकि कम से कम 320 भारतीय नागरिकों का अभी पता नहीं चल पाया है। कई भारतीय सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं और उन्होंने बाढ़ की भयावह स्थिति की जानकारी साझा की है।

भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री और मेडिकल/रेस्क्यू आकलन टीम भी भेजी है। अब तक भारतीय वायुसेना की उड़ानों के जरिए 57.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है।

नेपाल की इस त्रासदी में भारत समेत कई देशों ने सहायता की पेशकश की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत और पुनर्वास के लिए सहयोग बढ़ रहा है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, खतरनाक इलाकों में फंसे लोगों को निकालना और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को बहाल करना है।

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