बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के प्रस्तावित भारत दौरे को लेकर ढाका और नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय और बीएनपी (BNP) नेतृत्व की ओर से यह संदेश दिया गया है कि ढाका भारत यात्रा को लेकर “कोई जल्दबाजी में नहीं है” और उसके लिए ‘राष्ट्रीय हित’ तथा ‘अनुकूल माहौल’ सबसे ऊपर हैं।
कूटनीतिक तनाव और राष्ट्रपति भवन का घटनाक्रम
- राष्ट्रपति भवन का नोटिफिकेशन और वापसी: राष्ट्रपति भवन ने शनिवार को होने वाले ‘चेंज ऑफ गार्ड’ समारोह को यह कहते हुए रद्द करने की अधिसूचना जारी की थी कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के औपचारिक स्वागत की फुल ड्रेस रिहर्सल होनी है। हालांकि, करीब एक घंटे बाद ही इस अधिसूचना को वापस ले लिया गया, जिससे प्रस्तावित दौरे पर सस्पेंस गहरा गया।
- विदेश मंत्रालय का रुख: भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यात्रा की तारीखों पर कहा कि फिलहाल साझा करने के लिए कोई निश्चित अपडेट नहीं है।
दौरे में देरी और गतिरोध की 3 मुख्य वजहें
- शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग: ढाका का साफ कहना है कि भारत यात्रा से पहले शेख हसीना के प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग पर नई दिल्ली से स्पष्ट जवाब मिलना जरूरी है। अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद से हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं।
- 5 अगस्त के वर्चुअल संदेश पर नाराजगी: पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा नई दिल्ली से दिए गए हालिया वर्चुअल संबोधन पर बांग्लादेश सरकार ने कड़ा ऐतराज जताया है और इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप माना है।
- ‘राष्ट्रीय हित पहले’ का घरेलू दबाव: बीएनपी और कट्टरपंथी सहयोगियों का घरेलू राजनीतिक दबाव है कि पीएम रहमान भारत दौरे पर तभी जाएं जब तीस्ता जल बंटवारे, सीमा सुरक्षा और प्रत्यर्पण पर बांग्लादेश की शर्तों को प्राथमिकता मिले।
भारत की ओर से रिश्ते सुधारने की कोशिश
ढाका में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेशी व्यापारिक नेताओं से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि तारिक रहमान का भारत दौरा ऐतिहासिक और यादगार हो। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारतीय सरजमीं पर बांग्लादेशी पीएम का पूरा और गरिमापूर्ण सम्मान किया जाएगा। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह केवल एक मुद्दे पर पूरे द्विपक्षीय संबंधों को बंधक नहीं बनने देना चाहता और कनेक्टिविटी, ऊर्जा व सीमा प्रबंधन पर आगे बढ़ने का पक्षधर है।


