अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अब तक की सबसे बड़ी और सख्त आर्थिक कार्रवाई (Economic D-Day) की घोषणा की है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो भी देश, वित्तीय संस्थान, व्यापारी या सरकारी संस्था ईरान को किसी भी प्रकार की वित्तीय या व्यापारिक मदद प्रदान करेगी, उसे अमेरिका के कड़े आर्थिक परिणामों और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।
ट्रंप की चेतावनी और मुख्य बातें
- ‘इकोनॉमिक डी-डे’ की घोषणा: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी देश के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक अभियान चला रहा है।
- मददगार देशों को चेतावनी: उन्होंने स्पष्ट किया कि तेल की तस्करी (Oil Smuggling), कैश ट्रांसफर, शेल कंपनियों और वित्तीय नेटवर्क के जरिए ईरान की मदद करने वाले सभी तंत्रों को तुरंत बंद करना होगा।
- परमाणु और सैन्य क्षमता पर रुख: ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी व सहयोगी कार्रवाइयों से ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता जर्जर हो चुकी है। उन्होंने दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा।
क्या बढ़ेगा वैश्विक और क्षेत्रीय तनाव?
- व्यापारिक देशों पर दबाव: चीन (जो ईरान के तेल का मुख्य खरीदार है) और रूस जैसे देशों के अलावा तुर्की और मध्य पूर्व के कई सहयोगी देशों के साथ अमेरिका के कूटनीतिक संबंधों में खिंचाव बढ़ सकता है।
- रणनीतिक जलमार्ग और ऊर्जा संकट: यूएई द्वारा ईरान के साथ व्यापार निलंबित करने और स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) क्षेत्र में जारी अनिश्चितता से वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्ग पर दोबारा संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है।
ट्रंप प्रशासन की इस ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी’ (Operation Economic Fury) की रणनीति से कूटनीतिक वार्ता के रास्ते और कठिन होने की संभावना जताई जा रही है।


