भारत में मानसून एक बार फिर अत्यधिक सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहाड़ी राज्यों—विशेषकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड—के लिए भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत के राज्य असम में बाढ़ और बारिश से स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है, जहाँ मौतों का आंकड़ा 100 के पार पहुँच गया है। मध्य भारत, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी मध्यम से तेज बारिश की गतिविधियाँ दर्ज की जा रही हैं।
पहाड़ी राज्यों में ऑरेंज और येलो अलर्ट
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में IMD ने भारी बारिश और अचानक बाढ़ (Flash Floods) की आशंका को देखते हुए अलर्ट जारी किया है।
- हिमाचल प्रदेश: मंडी, सिरमौर, शिमला और कुल्लू जिलों में भूस्खलन (Landslides) और नदियां उफान पर रहने का खतरा बना हुआ है। सिरमौर में कई स्थानों पर जलभराव और तेज बहाव के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने पड़े हैं।
- उत्तराखंड: देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, पौड़ी और नैनीताल जिलों में संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में यात्रा न करने की सलाह दी गई है। नदियों और पहाड़ी नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका व्यक्त की गई है।
असम में बाढ़ का कहर: मौतों का आंकड़ा 100 पार
पूर्वोत्तर राज्य असम में पिछले कई हफ्तों से जारी मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान ने भीषण तबाही मचाई है।
- प्रभावित क्षेत्र: राज्य के 20 से अधिक जिले बाढ़ और जलभराव की चपेट में हैं।
- जान-माल का नुकसान: बाढ़ और भूस्खलन से जुड़ी घटनाओं में अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। लाखों लोग बेघर होकर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।
- काजीरंगा नेशनल पार्क: राष्ट्रीय उद्यान का बड़ा हिस्सा जलमग्न है, जिससे वन्यजीवों की सुरक्षा भी चुनौती बनी हुई है।
मैदानी इलाकों का हाल और IMD की चेतावनी
| राज्य / क्षेत्र | मौसम का हाल व चेतावनी |
| राजस्थान व मध्य प्रदेश | पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट। |
| उत्तर प्रदेश व बिहार | पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना। |
| दिल्ली-एनसीआर | बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना। |
IMD की मुख्य हिदायतें
- पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा से बचें: भूस्खलन संभावित मार्गों और कच्चे रास्तों पर सफर करने से बचें।
- नदी-नालों से दूरी रखें: अचानक जलस्तर बढ़ने और फ्लैश फ्लड के खतरों को देखते हुए जल स्रोतों के पास न जाएं।
- स्थानीय प्रशासन के संपर्क में रहें: संवेदनशील जिलों के निवासी आधिकारिक बुलेटिन और आपातकालीन नंबरों का ध्यान रखें।


