संसदीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी समिति के अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा (Meta) को कड़ा अल्टीमेटम दिया है। यह विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो पोस्ट को मेटा द्वारा अपने प्लेटफॉर्म पर कुछ समय के लिए प्रतिबंधित (हटाए जाने) किए जाने के बाद शुरू हुआ है। संसदीय समिति ने मेटा से 10 दिनों के भीतर इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत ऑडिट ट्रेल (Audit Trail) रिपोर्ट और लिखित जवाब भी मांगा है।
मुख्य बिंदु और चेतावनी
- तीन दिन का अल्टीमेटम: निशिकांत दुबे ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से इस घटना पर व्यक्तिगत रूप से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है।
- ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा छीनने की चेतावनी: उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जुकरबर्ग और मेटा तीन दिन के भीतर लिखित में माफी नहीं मांगते और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं करते, तो आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत मेटा को प्राप्त ‘सेफ हार्बर’ (Safe Harbor Legal Shield) सुरक्षा वापस ले ली जाएगी। सेफ हार्बर सुरक्षा हटने के बाद मेटा अधिकारियों के खिलाफ सीधे एफआईआर (FIR) और आपराधिक मामले दर्ज किए जा सकेंगे।
विवाद का मुख्य कारण
23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए पेपर लीक के खिलाफ कड़े कानूनों का आश्वासन देने वाला एक वीडियो पोस्ट किया था।
| घटना विवरण | जानकारी |
| मामला | प्रधानमंत्री के आधिकारिक हैंडल से पोस्ट किए गए वीडियो को प्रतिबंधित करना। |
| समय | यह वीडियो लगभग 5 घंटे (रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक) गायब रहा। |
| मेटा का तर्क | मेटा ने इसे एक “तकनीकी खराबी” (Technical Glitch) बताते हुए खेद व्यक्त किया। |
| समिति का रुख | आईटी समिति ने तकनीकी खराबी के तर्क को खारिज करते हुए इसे देश की संप्रभुता पर हमला और “एल्गोरिदम का पूर्वाग्रह” करार दिया। |


