पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में उग्र जनआंदोलन, हालिया चुनावी हिंसा और इमरान खान की पार्टी (PTI) के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच शहबाज शरीफ सरकार ने विदेशी मीडिया पर बड़ी प्रशासनिक पाबंदियां लगा दी हैं। दुनिया के सामने अपनी फजीहत और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को छिपाने के लिए सरकार ने ‘फॉरेन मीडिया फैसिलिटेशन गाइडलाइंस 2026’ जारी की हैं।
1. क्या हैं नए नियम?
- NOC लेना अनिवार्य: अब किसी भी विदेशी पत्रकार, फ्रीलांसर या मीडिया क्रू को केवल इस्लामाबाद, लाहौर और कराची में रहने की छूट होगी। इन तीन शहरों से बाहर कहीं भी रिपोर्टिंग, वीडियो शूटिंग या डॉक्यूमेंट्री बनाने से पहले सरकार के ‘एक्सटर्नल पब्लिसिटी (EP) विंग’ से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
- हर कदम पर निगरानी: विदेशी मीडिया हाउसों, लोकल फिक्सर्स, प्रोडक्शन टीम और सोशल मीडिया क्रिएटर्स तक को EP विंग में खुद का रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
2. पाबंदियों के पीछे की मुख्य वजहें
| क्षेत्र | मुख्य कारण / स्थिति |
|---|---|
| PoK में मानवाधिकार उल्लंघन | जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रदर्शनों और सेना की हिंसक कार्रवाई में दर्जनों नागरिकों की मौत की खबरें बाहर आने से अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ना। |
| पीओके चुनावी हिंसा | हाल ही में संपन्न चुनावों में भारी धांधली, झड़पों और विपक्ष के बहिष्कार की खबरों पर पर्दा डालना। |
| देशव्यापी राजनीतिक अस्थिरता | पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर पूरे देश में पीटीआई समर्थकों का उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू होना। |
3. प्रेस की आजादी पर अंतरराष्ट्रीय चिंता
मानवाधिकार संगठनों (जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल) और वैश्विक मीडिया घरानों ने इन पाबंदियों पर गंभीर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेना और सरकार की ज्यादतियों को छुपाने के लिए ही इस प्रकार की सेंसरशिप लागू की जा रही है ताकि पीओके और बलूचिस्तान जैसे संवेदनशील इलाकों की जमीनी हकीकत दुनिया के सामने न आ सके।


