मध्य एशियाई देश उज्बेकिस्तान (मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर की जन्मभूमि) के साथ भारत ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को नया आयाम दिया है। उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियार सैदोव की चार दिवसीय भारत यात्रा के दौरान नई दिल्ली में उच्च-स्तरीय बातचीत हुई, जिससे मध्य एशिया में भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन बदलने के संकेत मिले हैं।
रणनीतिक साझेदारी और महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ हुई बैठकों में भारत और उज्बेकिस्तान ने खनन (माइनिंग), ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, बुनियादी ढांचे और शिक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
- रेयर अर्थ मिनरल्स पर ध्यान: भारत ने उज्बेकिस्तान के समृद्ध खनन क्षेत्र, विशेष रूप से क्रिटिकल और रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ खनिज संसाधनों) में निवेश और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।
- व्यापारिक लक्ष्य: दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में करीब 1.3 अरब डॉलर है, जिसे आने वाले सालों में बढ़ाकर 2 अरब डॉलर और फिर 3 से 5 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
चीन की चालाकी पर भारी पड़ा भारत का कदम
वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन पर चीन का एकाधिकार है। चीन अपनी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजना के जरिए उज्बेकिस्तान और मध्य एशिया में पैठ जमाने की कोशिश कर रहा था।
- चीन-विरोधी भावनाएं: उज्बेकिस्तान में चीनी निवेश के चलते आर्थिक संप्रभुता और सांस्कृतिक पहचान खोने की आशंका से चीन-विरोधी भावनाएं बढ़ी हैं।
- चीन का विकल्प: भारत द्वारा उज्बेकिस्तान के साथ माइनिंग और ऊर्जा में साझेदारी मजबूत करने से चीन के वर्चस्व और उसकी सप्लाई-चेन पर निर्भरता को सीधी चुनौती मिलेगी।
आतंकवाद पर पाकिस्तान की घेराबंदी
विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भारत और उज्बेकिस्तान का रुख पूरी तरह से एक समान रहा है।
- जीरो टॉलरेंस नीति: दोनों देशों ने आतंकवाद, उग्रवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति दोहराई है।
- पाक पर निशाना: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सीमा-पार आतंकवाद और आतंकवादियों के महफूज ठिकानों (Safe Havens) के खिलाफ उज्बेकिस्तान के मजबूत रुख की सराहना की, जिससे पाकिस्तान वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ रहा है।
शिक्षा व सांस्कृतिक जुड़ाव
राष्ट्रपति भवन में हुई बैठक के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने बताया कि उज्बेकिस्तान के 3,000 से अधिक पेशेवरों ने भारत के ITEC कार्यक्रम का लाभ उठाया है और वर्तमान में 16,000 से अधिक भारतीय छात्र उज्बेकिस्तान में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।


