बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के बाद एग्जिट पोल के आंकड़ों ने राज्य के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। भाजपा के पूर्व विधायक व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई इस सीट पर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर और भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा के बीच सीधी व दिलचस्प टक्कर देखने को मिल रही है। कई एग्जिट पोल और ओपिनियन सर्वे जन सुराज (PK) को बढ़त बनाते हुए दिखा रहे हैं। 3 अगस्त को आने वाले अंतिम नतीजे ही यह तय करेंगे कि पटना का यह गढ़ भाजपा अपने कैडर तंत्र के दम पर बरकरार रखती है या प्रशांत किशोर ‘जन सुराज’ का परचम लहराकर बिहार की भावी राजनीति का नया अध्याय लिखते हैं।
एग्जिट पोल का रुझान: प्रशांत किशोर को बढ़त का अनुमान
सर्वे एजेंसियों के मुताबिक बांकीपुर में मुकाबला काफी कड़ा है, लेकिन प्रशांत किशोर के पक्ष में बड़ा रुझान दिख रहा है:
- POIL Pandit एग्जिट पोल: प्रशांत किशोर (जन सुराज) को 50 से 54% वोट शेयर मिलने का अनुमान जताया गया है। वहीं भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा को 38-42% और राजद की रेखा गुप्ता को मात्र 5% वोट मिलते दिखाए गए हैं।
- DV Research एग्जिट पोल: जन सुराज को 43%, भाजपा को 39% और राजद को 15% वोट मिलने की संभावना जताई गई है।
क्या सवर्णों और कोर वोटरों की नाराजगी से बिगड़ा समीकरण?
बांकीपुर को दशकों से भाजपा का अभेद्य किला और सवर्ण (कायस्थ, भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण) बहुल गढ़ माना जाता रहा है। हालांकि इस उपचुनाव में समीकरण बदलते दिख रहे हैं:
- पारंपरिक वोट बैंक में सेंध: उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी कैडर और स्थानीय सवर्ण समुदाय के एक वर्ग में दिखी नाराजगी का सीधा फायदा जन सुराज को मिलता नजर आ रहा है।
- स्थानीय मुद्दे और छात्र आंदोलन: भरत तिवारी प्रकरण, जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन और नीट विवाद जैसे मुद्दों ने शहरी-शिक्षित व युवा मतदाताओं को प्रभावित किया।
- MY समीकरण में विभाजन: वरिष्ठ नेताओं के दावों के मुताबिक राजद के मुख्य आधार मुस्लिम-यादव (MY) वोटरों ने भी इस बार भाजपा को हराने के लिए प्रशांत किशोर को विकल्प माना और जन सुराज के पक्ष में मतदान किया।
भाजपा का कैडर वोट और कम वोटिंग प्रतिशत का पेच
34.30% के कम मतदान प्रतिशत ने मुकाबले को बेहद पेचीदा बना दिया है।
- कम मार्जिन की उम्मीद: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा अपना कैडर वोट बैंक पूरी तरह सहेजने में कामयाब रही, तो वह 2,000 से 4,000 वोटों के बहुत कम अंतर से अपनी सीट बचा सकती है।
- बदलाव की बयार: यदि युवा और निष्पक्ष मतदाता एकजुट होकर बूथों तक पहुंचे हैं, तो प्रशांत किशोर इस पारंपरिक सीट पर ऐतहासिक उलटफेर कर सकते हैं।


