वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक के विरोध में हुए आंदोलनों के दौरान गिरफ्तार और आरोपी बनाए गए छात्रों/प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता (Legal Aid) प्रदान करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सिब्बल ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा बनाए गए लीगल एड फंड में 1 करोड़ रुपये का योगदान दिया है।
कानूनी मदद के लिए 1 करोड़ का फंड
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिब्बल ने ऐलान किया कि वह इस अभियान के लिए अपनी ओर से 1 करोड़ रुपये की राशि दे रहे हैं। आमतौर पर मुकदमों के लिए भारी-भरकम फीस लेने वाले देश के जाने-माने वकीलों में शुमार कपिल सिब्बल ने इस बार युवाओं व छात्रों के समर्थन में मुफ़्त कानूनी सहायता (Pro Bono Legal Aid) के लिए वित्तीय सहयोग का हाथ बढ़ाया है। उन्होंने देशभर के अन्य अधिवक्ताओं से भी आगे आकर इस फंड में योगदान देने और प्रभावित प्रदर्शनकारियों की पैरवी करने की अपील की है।
क्यों पड़ी इस फंड की जरूरत?
CJP के प्रवक्ताओं (सौरव दास और आशुतोष रंका) के अनुसार, 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई वार्ता के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया था और सरकार ने किसी भी छात्र या प्रदर्शनकारी पर दंडात्मक कार्रवाई न करने तथा सभी दर्ज FIR वापस लेने का आश्वासन दिया था।
हालांकि, CJP का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद दिल्ली, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में प्रदर्शनकारियों व छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं और उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है। इसी के चलते छात्रों को कानूनी संरक्षण देने के लिए यह फंड तैयार किया गया है।
लीगल एड नेटवर्क और समर्पित वेबसाइट
कपिल सिब्बल और CJP ने एक ऐसा डिजिटल मैकेनिज्म तैयार करने की घोषणा की है:
- वेबसाइट की शुरुआत: एक विशेष पोर्टल लॉन्च किया जाएगा जहां उन छात्रों का विवरण उपलब्ध होगा जिनके खिलाफ पुलिस केस दर्ज हुए हैं।
- वकीलों को जोड़ना: देशभर के वकील, जो स्वेच्छा से या बिना किसी फीस के कानूनी मदद देना चाहते हैं, इस पोर्टल के जरिए जुड़ सकेंगे।
- मामलों की ट्रैकिंग: शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ दर्ज FIRs और मुकदमों को रद्द (Quash) कराने तथा उन्हें कानूनी राहत दिलाने के लिए कोर्ट में पैरवी की जाएगी। CJP ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां नहीं रुकती हैं और लिखित समझौता पूरा नहीं किया जाता, तो वे दोबारा आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।


