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    20 साल बाद संसद भवन तक पहुंचे प्रदर्शनकारी, 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल, IPS भी शिकार

    नीट (NEET) परीक्षा में कथित धांधली, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई/अनशन के समर्थन में राजधानी दिल्ली में भड़का विरोध प्रदर्शन भीषण हिंसक झड़प में बदल गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले आयोजित ‘संसद चलो’ (Chalo Sansad) मार्च के दौरान हजारों की संख्या में छात्र और युवा सड़कों पर उतर आए।

    संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन हुए इस अप्रत्याशित मार्च ने सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दीं। करीब दो दशकों बाद ऐसा हुआ जब प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह पुलिस द्वारा लगाए गए कई स्तर के बैरिकेड्स तोड़कर संसद भवन के बेहद करीब पहुंच गया।

    रणक्षेत्र बना लुटियंस दिल्ली, चले लाठी-डंडे और आंसू गैस

    जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह प्रदर्शन दोपहर होते-होते नियंत्रण से बाहर हो गया। पुलिस और अर्धसैनिक बलों के करीब 3,000 जवानों की तैनाती के बावजूद प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे।

    • लाठीचार्ज और आंसू गैस: संसद की ओर बढ़ते जनसैलाब को रोकने के लिए पुलिस ने पहले चेतावनी दी और फिर जमकर लाठीचार्ज किया व आंसू गैस के गोले दागे।
    • पत्थरबाजी और तोड़फोड़: भीड़ की ओर से भी पुलिस बलों पर पथराव किया गया। हिंसक झड़पों के दौरान पुलिस की 15 से 20 गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया या तोड़फोड़ की गई।
    • इंटरनेट सेवाएं बंद: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नई दिल्ली जिले के कई इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और धारा 163 (BNSS) लागू की गई।

    118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल, IPS अधिकारी भी शिकार

    दिल्ली पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस हिंसा में 118 से अधिक पुलिस और सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें कई वरिष्ठ IPS और अधिकारी शामिल हैं।

    वहीं दूसरी ओर, CJP और अस्पताल सूत्रों के मुताबिक 50 से अधिक प्रदर्शनकारी छात्र और कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हुए हैं। राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में दर्जनों घायलों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया।

    CCTV और वीडियो से होगी हमलावरों की पहचान

    दिल्ली पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाया है। पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक के बाद बयान जारी किया गया कि प्रदर्शनकारियों ने गैर-कानूनी तरीके से निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

    पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में लगे CCTV कैमरों, ड्रोन फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच करके हिंसा भड़काने वाले और पुलिस पर हमला करने वाले उपद्रवियों की पहचान की जा रही है, जिन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    धरपकड़ और अनशन जारी

    कार्रवाई के दौरान CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके समेत 70 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इधर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में अपना अनशन जारी रखने का ऐलान किया है, वहीं CJP नेताओं ने मांगें न पूरी होने तक जंतर-मंतर पर डटे रहने की बात कही है।

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