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    अर्श से फर्श पर आ गई भारतीय टीम, आयरलैंड-इंग्लैंड से हार, ये हैं मुख्य कारण

    कुछ ही महीने पहले टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम करने वाली भारतीय टीम अर्श से फर्श पर आ गई है। विश्व विजेता बनने के तुरंत बाद टीम इंडिया को पहले आयरलैंड के खिलाफ 2-0 से ऐतिहासिक और शर्मनाक क्लीन स्वीप का सामना करना पड़ा, और अब इंग्लैंड के खिलाफ भी पांच मैचों की टी20 सीरीज में टीम लगातार मैच हारकर सीरीज गंवा चुकी है। टूर्नामेंट्स में टीम इंडिया के अचानक इस तरह पटरी से उतरने की 8 बड़ी वजहें सामने आई हैं:

    1. कप्तानी में अचानक बदलाव और अस्थिरता

    विश्व कप की जीत के बाद सूर्यकुमार यादव को हटाकर अचानक श्रेयस अय्यर को टी20 टीम का नया कप्तान नियुक्त किया गया। इस अप्रत्याशित बदलाव ने टीम के स्थापित ऊंचे मनोबल और सेट ढांचे को हिलाकर रख दिया। अय्यर की कप्तानी की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है।

    2. ओवरकॉन्फिडेंस और लापरवाही भरा रवैया

    महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर समेत कई विशेषज्ञों ने भारत की हार की मुख्य वजह खिलाड़ियों के ‘अत्यधिक आत्मविश्वास’ और ‘लापरवाही’ को बताया है। विश्व विजेता होने के अहंकार में खिलाड़ी मैदान पर परिस्थितियों के अनुसार खेल दिखाने में नाकाम रहे।

    3. पावरप्ले में टॉप-ऑर्डर का लगातार फ्लॉप होना

    चाहे आयरलैंड का दौरा हो या इंग्लैंड की उछाल भरी पिचें, भारतीय टॉप-ऑर्डर ताश के पत्तों की तरह बिखरता दिखा। पहले छह ओवरों में रन बनाने के बजाय टीम इंडिया नियमित अंतराल पर अपने मुख्य विकेट गंवाती रही (जैसे बेलफास्ट में टीम 19/3 और ट्रेंट ब्रिज में 76 पर ऑलआउट हुई)।

    4. जसप्रीत बुमराह और सीनियर दिग्गजों की कमी

    रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों के बाद अब गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति टीम को सबसे ज्यादा खल रही है। बुमराह के बिना भारतीय गेंदबाजी आक्रमण पूरी तरह दिशाहीन नजर आ रहा है, जो न तो पावरप्ले में विकेट ले पा रहा है और न ही डेथ ओवरों में रन रोक पा रहा है।

    5. परिस्थितियों के अनुरूप ढलने (Adaptability) में विफलता

    मुख्य कोच गौतम गंभीर और सहायक कोच रयान टेन डोएशेट ने माना कि खिलाड़ी आईपीएल (IPL) के सपाट पिचों वाले आक्रामक अंदाज को विदेशी पिचों पर नहीं बदल पाए। बेलफास्ट और इंग्लैंड की स्विंग व सीम लेती पिचों पर अंधाधुंध शॉट खेलने के चक्कर में बल्लेबाजों ने अपने विकेट गंवाए।

    6. मध्यक्रम में साझेदारियों का न बनना

    पूरी सीरीज के दौरान मध्यक्रम में कोई बड़ी साझेदारी देखने को नहीं मिली। किसी एक मैच में अभिषेक शर्मा या तिलक वर्मा (आयरलैंड के खिलाफ 55 रन) अकेले लड़ते दिखे, तो दूसरे छोर से उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला। अनुभवी खिलाड़ियों ने सिचुएशन के हिसाब से एंकर रोल निभाने की जिम्मेदारी नहीं ली।

    7. ‘हाई रिस्क, हाई रिवॉर्ड’ रणनीति का बैकफायर होना

    कोच गंभीर ने टीम के अति-आक्रामक ‘हाई रिस्क, हाई रिवॉर्ड’ एप्रोच का बचाव तो किया, लेकिन यह रणनीति लगातार बैकफायर कर रही है। जब शीर्ष तीन बल्लेबाज फेल हो रहे हैं, तो मध्यक्रम पारी को संभालने के बजाय उसी आक्रामक शैली में आउट हो रहा है।

    8. टीम का रीबिल्डिंग फेज और जरूरत से ज्यादा प्रयोग

    रोहित-विराट के जाने के बाद टीम एक बड़े बदलाव (Reset Mode) से गुजर रही है। टीम में 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को ओपनिंग कराना, प्रिंस यादव और हर्षित राणा जैसे युवाओं को सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े देशों के सामने उतारना भारी पड़ गया। गंभीर के अनुसार, इस पुनर्गठन में समय लगेगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार 5 हार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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