दुनियाभर में भारत के रक्षा क्षेत्र का डंका बज रहा है। भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और स्वदेशी आकाशतीर (Akashteer) एयर डिफेंस सिस्टम की धाक इस वक्त पूरी दुनिया में देखी जा सकती है। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा इन घातक हथियारों को खरीदने की दिलचस्पी की खबरों ने वैश्विक रक्षा बाजार में खलबली मचा दी है। भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की कतार में केवल यूएई ही नहीं, बल्कि इंडोनेशिया, मलेशिया, सऊदी अरब और ब्राजील समेत 17 से ज्यादा देश शामिल हैं।
फिलीपींस बना पहला खरीदार, अब इंडोनेशिया की बारी
भारत ने साल 2022 में फिलीपींस के साथ लगभग 375 मिलियन डॉलर का पहला विदेशी ब्रह्मोस रक्षा सौदा करके बड़ी सुर्खियां बटोरी थीं, जिसकी डिलीवरी भी शुरू हो चुकी है। फिलीपींस के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा देश इंडोनेशिया भी विवादित दक्षिण चीन सागर (South China Sea) और नटुना द्वीप समूह में चीनी विस्तारवाद को रोकने के लिए भारत के साथ ब्रह्मोस मिसाइल की डील को अंतिम रूप देने में जुटा है।
यूएई की दिलचस्पी और सऊदी अरब की तीखी प्रतिक्रिया
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे हालिया संघर्षों, मिसाइल और ड्रोन हमलों ने खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं को बदलने पर मजबूर कर दिया है। पारंपरिक रूप से अमेरिकी और यूरोपीय हथियारों पर निर्भर रहने वाला यूएई (UAE) अब अपनी हवाई और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत की ओर देख रहा है। यूएई न सिर्फ दुनिया की सबसे तेज क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ बल्कि भारत के ‘आकाशतीर’ कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क को भी अपने बेड़े में शामिल करना चाहता है।
हालांकि, भारत और यूएई के बीच इस संभावित ब्रह्मोस डील की आहट ने खाड़ी देशों, विशेषकर सउदी अरब में एक नई बहस छेड़ दी है। सऊदी अरब के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस डील को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इसकी मुख्य वजह क्षेत्र में बदलता ताकत का संतुलन और सऊदी-यूएई के बीच के आपसी समीकरण हैं।
पाकिस्तान और चीन की उड़ी नींद
ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता और इसकी अचूक गति (मैक 2.8 या ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज) का लोहा पूरी दुनिया मानती है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और अतीत की कुछ अन्य घटनाओं के दौरान यह साबित हो चुका है कि पाकिस्तान के पास मौजूद आधुनिक चीनी एयर डिफेंस सिस्टम भी ब्रह्मोस को ट्रैक या इंटरसेप्ट (रोकने) करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।
यही वजह है कि जब भी किसी बड़े मुस्लिम बहुल या रणनीतिक देश (जैसे इंडोनेशिया या यूएई) द्वारा ब्रह्मोस खरीदने की बात सामने आती है, तो पाकिस्तान और चीन के रक्षा खेमे में हड़कंप मच जाता है।
रक्षा निर्यातक के रूप में उभरता भारत
यदि भारत और यूएई के बीच यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह खाड़ी क्षेत्र में भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा निर्यात होगा। यह सौदा न केवल भारत और यूएई के रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को एक बड़े सैन्य आपूर्तिकर्ता और ‘डिफेंस एक्सपोर्ट पावर’ के रूप में स्थापित कर देगा।


