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    भारत को समझौते को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए, कांग्रेस ने कहा-ट्रंप को खुश करना बंद करें

    प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (India-US Trade Agreement) को लेकर देश में सियासी पारा चढ़ गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमीसन ग्रीर (Jamieson Greer) के नई दिल्ली दौरे के बीच मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने पीएम मोदी को सलाह दी है कि वे अपने ‘अच्छे दोस्त’ डोनाल्ड ट्रंप को खुश करना बंद करें और देश के हितों के खिलाफ जाकर किसी भी व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करें।

    कांग्रेस का आरोप: भारत के लिए घाटे का सौदा है यह समझौता

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर इस समझौते को लेकर सरकार की नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस प्रस्तावित डील को भारत के लिए एक बड़ा ‘नुकसान’ (Steal) करार दिया, जिससे सिर्फ अमेरिका को फायदा होने वाला है। जयराम रमेश के अनुसार, 6 फरवरी 2026 को जारी भारत-अमेरिका संयुक्त बयान के तहत जो ढांचा तैयार हुआ था, उसकी शर्तें भारत के हितों के प्रतिकूल हैं:

    • अमेरिका का वादा: अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर टैरिफ (शुल्क) को 25% से घटाकर 18% करने का वादा किया था।
    • भारत की प्रतिबद्धता: इसके बदले में भारत ने अमेरिकी कृषि उत्पादों और औद्योगिक वस्तुओं पर से टैरिफ को पूरी तरह खत्म करने या भारी कटौती करने का वादा किया। इसके साथ ही भारत ने अगले 5 वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीदारी करने का आश्वासन भी दिया है।

    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला और अनिश्चितता

    कांग्रेस ने दावा किया कि फरवरी 2026 में बनी इस सहमति का कानूनी आधार अब खत्म हो चुका है। जयराम रमेश ने बताया कि 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप की ‘पारस्परिक टैरिफ रणनीति’ (Reciprocal Tariff Strategy) को अवैध घोषित कर दिया था।

    इस फैसले के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने भारत सहित अपने सभी व्यापारिक साझेदारों पर 10% का अस्थायी टैरिफ लगा दिया। इस अस्थाई शुल्क की कानूनी अवधि 24 जुलाई 2026 को समाप्त हो रही है, जिसके बाद क्या स्थिति होगी, इसे लेकर भारी अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में भारत द्वारा अपनी रियायतें जारी रखना समझदारी नहीं है।

    ‘चीन विवाद’ से ध्यान भटकाने का प्रयास?

    विपक्ष ने इस समझौते की टाइमिंग पर भी राजनीतिक तंज कसा है। कांग्रेस का आरोप है कि संसद में जब राहुल गांधी ने चीन के मुद्दे पर सरकार को घेरा था, तब उस दबाव से ध्यान भटकाने और अपनी छवि बचाने के लिए पीएम मोदी के अनुरोध पर फरवरी में यह जल्दबाजी भरा संयुक्त बयान जारी करवाया गया था।

    कांग्रेस की मांग: कांग्रेस ने मांग की है कि जब तक अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर टैरिफ कम करने की कोई ठोस और स्थायी कानूनी गारंटी नहीं मिलती, तब तक भारत सरकार को इस अंतरिम व्यापार समझौते को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। देश के किसानों और घरेलू उद्योगों की कीमत पर अमेरिकी हितों को तवज्जो देना बंद होना चाहिए।

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