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    इस्लामाबाद दिखाए राजनयिक इच्छाशक्ति, पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स ने दी सलाह

    अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई ऐतिहासिक अंतरिम डील में मध्यस्थता करने के बाद पाकिस्तान की वैश्विक कूटनीति में काफी चर्चा हो रही है। अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तानी सेना प्रमुख (फील्ड मार्शल) असीम मुनीर की तारीफ किए जाने के बाद, अब पाकिस्तान के भीतर से ही भारत के साथ रिश्ते सुधारने की मांग उठने लगी है। पाकिस्तानी विशेषज्ञों और मीडिया का मानना है कि इस्लामाबाद को अपनी इसी राजनयिक इच्छाशक्ति का इस्तेमाल नई दिल्ली के साथ जमी बर्फ को पिघलाने के लिए करना चाहिए।

    अमेरिका-ईरान डील से मिला हौसला

    पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘डॉन’ (Dawn) ने अपने संपादकीय में पाकिस्तान की इस कूटनीतिक सफलता की तुलना 1970 के दशक की ऐतिहासिक घटना से की है, जब पाकिस्तान के रास्ते ही अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर गुपचुप चीन गए थे और अमेरिका-चीन के बीच दोस्ती का रास्ता खुला था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जब पाकिस्तान वाशिंगटन और तेहरान जैसी धुर विरोधी ताकतों को एक मंच पर ला सकता है, तो वह अपने पड़ोसियों के साथ जारी तनाव को भी दूर कर सकता है।

    ‘भारत की ओर बढ़ाएं दोस्ती का हाथ’

    पाकिस्तानी कूटनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान की बदहाल आर्थिक स्थिति और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए शहबाज शरीफ सरकार को भारत और अफगानिस्तान के साथ जारी तनाव को हर हाल में कम करना होगा।

    • बड़ा दिल दिखाने की जरूरत: विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान को अपने राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाए बिना, एक बार फिर भारत को बातचीत की मेज पर आने के लिए आमंत्रित करना चाहिए।
    • तनाव कम करना प्राथमिकता: भारत और पाकिस्तान के बीच ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से सीमा पर और राजनीतिक मोर्चे पर कड़वाहट काफी बढ़ गई है। ऐसे में आर्थिक स्थिरता के लिए व्यापार और कूटनीतिक संवाद को फिर से शुरू करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।

    भारत की ओर से भी सकारात्मक संकेत?

    दिलचस्प बात यह है कि इस बार केवल पाकिस्तान की तरफ से ही नहीं, बल्कि भारत की ओर से भी सकारात्मक माहौल बनता दिख रहा है:

    आरएसएस की पहल: हाल ही में भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बातचीत को फिर से शुरू करने की वकालत की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी आरएसएस के इस सकारात्मक रुख का स्वागत किया है।

    • ट्रैक-2 डिप्लोमेसी सक्रिय: रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए पर्दे के पीछे से ‘ट्रैक-2’ (Track-2 Dialogue) के तहत अब तक तीन दौर की गुप्त बातचीत हो चुकी है।

    विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि यदि पाकिस्तान को मौजूदा आर्थिक और सुरक्षा संकटों के चक्रव्यूह से बाहर निकलना है, तो उसे पुरानी जिद छोड़कर भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाना ही होगा। वैश्विक मंच पर बढ़े अपने कूटनीतिक कद का इस्तेमाल करने का पाकिस्तान के पास यह सबसे सही मौका है।

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