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    उत्तर प्रदेश में ‘मिशन 2027’ का बिगुल बजा, AIMIM ने सपा के गढ़ों में उतारे प्रत्याशी

    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राज्य में सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समाजवादी पार्टी (सपा) के पारंपरिक गढ़ों में अपने प्रत्याशी घोषित कर ‘मिशन 2027’ का बिगुल फूंक दिया है। ओवैसी के इस कदम से खासकर पूर्वांचल और अवध के क्षेत्रों में नए राजनीतिक समीकरण बनते दिख रहे हैं, जिसने समाजवादी पार्टी की चिंता बढ़ा दी है।

    सपा के गढ़ में ओवैसी की रणनीति

    • मटेरा से चुनावी शंखनाद: असदुद्दीन ओवैसी ने बहराइच की मटेरा विधानसभा सीट से अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की है। पारंपरिक रूप से यह सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाती है, जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं और हमेशा मुस्लिम विधायक चुनते आ रहे हैं।
    • मुस्लिम-दलित (MD) समीकरण पर ध्यान: 2027 के चुनाव के लिए ओवैसी का मुख्य फोकस मुस्लिम और दलित गठजोड़ बनाने पर है। इसके लिए वे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन के संकेत भी दे रहे हैं। यदि यह गठबंधन जमीन पर उतरता है, तो सपा के पारंपरिक ‘मुस्लिम-यादव’ (MY) समीकरण को सीधी चुनौती मिलेगी।
    • 200 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा: AIMIM ने पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक अपने संगठन का विस्तार करने और राज्य की लगभग 200 मुस्लिम बहुल सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा किया है।

    क्यों बढ़ी समाजवादी पार्टी की टेंशन?

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद अखिलेश यादव खुद को एक ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ और उदार चेहरे के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वे अपनी ‘मुस्लिम परस्त’ वाली छवि से दूर रह सकें। अखिलेश की इस खामोशी और बदली हुई रणनीति का फायदा उठाने के लिए ओवैसी ने यूपी की मुस्लिम राजनीति के खाली पड़े मैदान में अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है।

    उत्तर प्रदेश की करीब 107 से अधिक विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता सीधा असर डालते हैं। यदि ओवैसी मुस्लिम वोटों के एक छोटे हिस्से को भी अपनी तरफ मोड़ने या सपा के वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब होते हैं, तो विपक्षी वोटों के बिखराव का सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मिल सकता है। हालांकि, सपा नेता ओवैसी की पार्टी को ‘वोट कटवा’ बताते हुए किसी भी गठबंधन की संभावना से इनकार कर रहे हैं, लेकिन ओवैसी के इस शुरुआती दांव ने 2027 के चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प बना दिया है।

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