संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के दुष्प्रचार को बेनकाब करते हुए उसे कड़ी फटकार लगाई है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंच का राजनीतिक लाभ और विभाजनकारी एजेंडे के लिए दुरुपयोग करने पर पाकिस्तान की तीखी आलोचना की है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान द्वारा चलाए जा रहे मनगढ़ंत और झूठे नैरेटिव को ‘राज्य प्रायोजित दुष्प्रचार’ (State-Sponsored Misinformation) करार दिया। सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान भारतीय राजनयिकों ने पाकिस्तान द्वारा गढ़े गए ‘फिटना अल-हिंदुस्तान’ (Fitna al-Hindustan) नैरेटिव का विशेष रूप से उल्लेख किया।
- भ्रामक नैरेटिव: भारत ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान अपने आंतरिक संकटों, अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों और आतंकवाद को बढ़ावा देने की अपनी नीति से भटकाने के लिए इस तरह के झूठे नैरेटिव फैला रहा है।
- दुनिया को गुमराह करने की कोशिश नाकाम: संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि (या वरिष्ठ राजनयिक) ने दृढ़ता से कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब पाकिस्तान की इन चालों को अच्छी तरह समझता है और दुनिया को गुमराह करने की उसकी यह कोशिश कभी कामयाब नहीं होगी।
अफगानिस्तान में हवाई हमलों पर उठाए तीखे सवाल
भारत ने अफगानिस्तान की सीमा के भीतर पाकिस्तान द्वारा किए गए सैन्य हवाई हमलों की कड़े शब्दों में आलोचना की। भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी नरसंहार को महज ‘सैन्य अभियान’ का नाम दे देने से उसकी जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की इस सैन्य कार्रवाई के कारण निर्दोष अफगान नागरिकों को भारी नुकसान और असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ी है।
“निर्दोष नागरिकों की हत्या करना, उन्हें गंभीर रूप से घायल करना और मासूम बच्चों को अनाथ बनाना किसी भी सूरत में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई नहीं कहा जा सकता।” भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की कथनी और करनी के अंतर को उजागर करते हुए उसे दोहरे रवैये वाला देश बताया। भारत ने सुरक्षा परिषद को अवगत कराया कि अपनी खुद की आंतरिक और घरेलू समस्याओं के लिए हमेशा अपने पड़ोसी देशों को जिम्मेदार ठहराना पाकिस्तान की पुरानी आदत रही है।
इस्लामी एकजुटता का ढोंग: भारत ने कहा कि एक तरफ तो पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खड़े होकर बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनों और ‘इस्लामी एकजुटता’ की दुहाई देता है, लेकिन दूसरी तरफ खुद रमजान जैसे पवित्र महीने में सैन्य कार्रवाई करने से बाज नहीं आता।
क्या है ‘फिटना अल हिंदुस्तान’ विवाद?
‘फिटना अल-हिंदुस्तान’ विवाद मुख्य रूप से पाकिस्तान द्वारा गढ़ा गया एक राजनीतिक नैरेटिव है, जिसका उद्देश्य बलूचिस्तान प्रांत में जारी आंतरिक उथल-पुथल का दोष भारत पर मढ़ना है। पाकिस्तान यह भ्रामक और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित अभियान सिर्फ इसलिए चला रहा है ताकि वह अपनी आंतरिक विफलताओं, आर्थिक संकट और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों से अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान भटका सके। पिछले वर्ष पाकिस्तान सरकार और उसकी सुरक्षा एजेंसियों ने बलूचिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों और उग्रवादी समूहों को आधिकारिक तौर पर ‘फिटना अल-हिंदुस्तान’ की श्रेणी में रखना शुरू किया था। पाकिस्तान का आरोप था कि ये सभी विद्रोही और उग्रवादी संगठन भारत के इशारे पर काम कर रहे हैं और उन्हें सीमा पार से समर्थन मिल रहा है। हालांकि, पाकिस्तान इस दावे के पक्ष में कोई भी ठोस या सार्वजनिक सबूत पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा है।


