दिल्ली की सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन के एक नए युग की शुरुआत हुई है। प्रदूषण मुक्त यात्रा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, दिल्ली में पहली बार हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली बसों (Hydrogen-Powered Buses) का परिचालन शुरू कर दिया गया है।
रूट और परिचालन विवरण
ये बसें फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुनिंदा मार्गों पर चलाई जा रही हैं।
- प्रारंभिक मार्ग: ये बसें मुख्य रूप से कर्तव्य पथ, इंडिया गेट और कनॉट प्लेस के आसपास के पर्यटन और व्यस्त इलाकों को जोड़ने वाले रूट पर चलेंगी।
- रिफ्यूलिंग केंद्र: इन बसों के लिए हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग की व्यवस्था राजघाट डिपो के पास बने विशेष केंद्र में की गई है।
किराया और सुविधाएं
प्रदूषण मुक्त और अत्याधुनिक तकनीक से लैस होने के बावजूद, इन बसों का किराया आम जनता की जेब को ध्यान में रखकर तय किया गया है।
- टिकट दर: इन बसों का किराया दिल्ली की मौजूदा एसी बसों (AC Buses) के बराबर ही रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक यात्री इस नई तकनीक का अनुभव कर सकें।
- सुविधाएं: बसें पूरी तरह से वातानुकूलित हैं और इनमें यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी (CCTV) और पैनिक बटन जैसी सुविधाएं दी गई हैं।
हाइड्रोजन बसें क्यों हैं खास?
दिल्ली जैसे महानगर के लिए, जहाँ वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है, हाइड्रोजन बसें एक गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं।
- जीरो एमिशन: ये बसें चलने के दौरान धुएं की जगह केवल पानी की बूंदें (Water Vapor) छोड़ती हैं, जिससे शून्य कार्बन उत्सर्जन होता है।
- कम शोर: पारंपरिक डीजल बसों के मुकाबले ये बसें बेहद शांत चलती हैं, जिससे ध्वनि प्रदूषण भी कम होता है।
- लंबी रेंज: एक बार फुल टैंक होने पर ये बसें बिजली से चलने वाली ई-बसों की तुलना में अधिक दूरी तय कर सकती हैं और इन्हें रिफ्यूल करने में भी बहुत कम समय लगता है।
भविष्य की योजना
सरकार की योजना आने वाले महीनों में हाइड्रोजन बसों की संख्या बढ़ाने की है। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के बेड़े में ऐसी और बसों को शामिल किया जाएगा, जिससे शहर की हवा को स्वच्छ रखने में मदद मिलेगी।


