भारत अपनी समुद्री शक्ति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बनने वाला ‘ग्रेट निकोबार इंटरनेशनल ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट’ (GNIIP) भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से गेम-चेंजर साबित होने वाला है। इस परियोजना का लक्ष्य विदेशी बंदरगाहों पर भारत की निर्भरता को खत्म करना और देश को वैश्विक व्यापार का एक प्रमुख केंद्र बनाना है।
विदेशी निर्भरता का अंत और आर्थिक लाभ
वर्तमान में, भारत के अंतरराष्ट्रीय कार्गो का एक बड़ा हिस्सा कोलंबो, सिंगापुर और क्लैंग (मलेशिया) जैसे विदेशी ट्रांस-शिपमेंट हब के माध्यम से गुजरता है।
- राजस्व की बचत: इस निर्भरता के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को सालाना पोर्ट हैंडलिंग शुल्क के रूप में भारी नुकसान होता है। इस नए हब के बनने से भारत प्रति वर्ष लगभग $200–220 मिलियन (करीब 1,700-1,800 करोड़ रुपये) का राजस्व बचाने में सक्षम होगा।
- आत्मनिर्भरता: यह परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘समुद्री संप्रभुता’ को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
रणनीतिक स्थान: मलक्का जलडमरूमध्य की निकटता
ग्रेट निकोबार की भौगोलिक स्थिति इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत है। यह पोर्ट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक ‘मलक्का जलडमरूमध्य’ (Malacca Strait) से मात्र 40 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है। पूर्व और पश्चिम को जोड़ने वाले अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट के पास होने के कारण, यह दुनिया भर के विशाल मालवाहक जहाजों के लिए एक आदर्श पड़ाव बनेगा।
विशाल क्षमता और बुनियादी ढांचा
इस परियोजना को कई चरणों में विकसित किया जा रहा है, जिसकी योजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है:
- क्षमता: इस पोर्ट की नियोजित क्षमता 16 मिलियन TEUs (Twenty-foot Equivalent Units) है।
- गहरा पानी: यहां प्राकृतिक रूप से पानी की गहराई लगभग 20 मीटर है, जो दुनिया के सबसे बड़े मालवाहक जहाजों (Ultra Large Container Vessels) को बर्थिंग सुविधा प्रदान करने में सक्षम है।
- निवेश: इस एकीकृत परियोजना में केवल पोर्ट ही नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, टाउनशिप और बिजली संयंत्र भी शामिल हैं, जिसमें कुल ₹72,000 करोड़ से अधिक का निवेश होने का अनुमान है।
भारत के लिए महत्व
- रोजगार सृजन: इस मेगा प्रोजेक्ट से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: सीधे भारत के अपने हब से व्यापार होने के कारण निर्यातकों और आयातकों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत और समय में कमी आएगी।
- हिंद महासागर में दबदबा: सामरिक दृष्टि से, यह पोर्ट हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति को और मजबूत करेगा, जो सुरक्षा और व्यापार दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
ग्रेट निकोबार ट्रांस-शिपमेंट हब केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत के समुद्री इतिहास में एक नया अध्याय लिखने की तैयारी है। विदेशी बंदरगाहों पर निर्भर रहने वाला भारत अब खुद दुनिया के लिए एक बड़ा शिपिंग डेस्टिनेशन बनने की राह पर है।


