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    ISI के निशानी पर UP विधानसभा चुनाव, आतंकी हमलों की रची जा रही साजिश

    पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले देश में बड़े आतंकी हमलों की साजिश रच रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान ने भारतीय जांच और खुफिया एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए एक ‘लॉन्ग गेम’ (Long Game) रणनीति तैयार की है। यहाँ इस खतरनाक साजिश और एजेंसियों के अलर्ट से जुड़ी मुख्य बातें दी गई हैं।


    ‘डिस्ट्रैक्शन’ की रणनीति (उलझाने का खेल)

    खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ISI ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। वह सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान भटकाने के लिए छोटे और कम महत्वपूर्ण इनपुट (सुराग) जानबूझकर लीक कर रही है।

    • मकसद: भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इन छोटे खतरों की जांच में उलझी रहें, जबकि बैकग्राउंड में किसी बड़े और भीषण हमले की तैयारी को अंजाम दिया जा सके।
    • निगरानी: एजेंसियों ने पाया है कि सीमा पार से संदिग्ध कॉल और मैसेज की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हुई है, जिनका उद्देश्य केवल सुरक्षा बलों को व्यस्त रखना है।

    यूपी चुनाव और सांप्रदायिक तनाव का लक्ष्य

    इस साजिश का मुख्य केंद्र उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव हैं।

    • सांप्रदायिक माहौल: ISI का उद्देश्य चुनावी माहौल के दौरान किसी बड़ी वारदात को अंजाम देकर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ना और राज्य में अस्थिरता पैदा करना है।
    • स्लीपर सेल्स सक्रिय: रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल सीमा और यूपी के संवेदनशील इलाकों में ‘स्लीपर सेल्स’ को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं।

    कट्टरपंथी तत्वों का इस्तेमाल

    पाकिस्तान अपनी इस साजिश के लिए सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहा है।

    • भड़काऊ कंटेंट: युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें ‘लोन वुल्फ’ (अकेले हमला करने वाले) हमलों के लिए उकसाने के लिए भड़काऊ वीडियो और प्रोपेगेंडा फैलाया जा रहा है।
    • फंडिंग: सीमा पार से हवाला के जरिए चुनावों में अशांति फैलाने के लिए भारी मात्रा में धन भेजने की भी सूचना मिली है।

    सुरक्षा एजेंसियों का अलर्ट और एक्शन

    ISI की इस ‘दोहरी चाल’ को देखते हुए भारतीय खुफिया एजेंसियां (IB, RAW) और यूपी एटीएस (ATS) पूरी तरह हाई अलर्ट पर हैं।

    • नेपाल बॉर्डर पर सख्ती: भारत-नेपाल सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
    • डिजिटल सर्विलांस: सोशल मीडिया हैंडल्स और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स की निगरानी तेज कर दी गई है ताकि किसी भी संदिग्ध संचार को समय रहते पकड़ा जा सके।
    • समन्वय: केंद्र और राज्य की एजेंसियां एक-दूसरे के साथ रीयल-टाइम डेटा साझा कर रही हैं ताकि ‘डिस्ट्रैक्शन’ के इस खेल को नाकाम किया जा सके।

    पाकिस्तान की यह नई चाल उसकी हताशा को दर्शाती है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय एजेंसियां इस ‘लॉन्ग गेम’ को समझने में सक्षम हैं और सुरक्षा चक्र को इतना मजबूत किया गया है कि किसी भी नापाक कोशिश को विफल किया जा सके। जनता से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या वस्तु की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

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