22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन मैदान में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जहां लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी। आज इस हमले की पहली बरसी पर भारत उन वीर जवानों और रणनीतियों को याद कर रहा है, जिन्होंने महज कुछ ही दिनों के भीतर आतंकियों और उनके आकाओं का नामोनिशान मिटा दिया।
ऑपरेशन महादेव: घाटी में आतंकियों का सफाया
पहलगाम हमले के तुरंत बाद भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन महादेव’ शुरू किया। इसका उद्देश्य हमले में शामिल प्रत्यक्ष आतंकियों को जीवित या मृत पकड़ना था। सेना ने आतंकियों के भागने के रूट को ट्रैक किया। सुरक्षा बलों ने अनंतनाग के जंगलों में आतंकियों को घेरा। घंटों चली भीषण मुठभेड़ के बाद, हमले के मुख्य मास्टरमाइंड ‘अबू हंजला’ सहित तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया गया। उनके पास से अमेरिकी निर्मित हथियार बरामद हुए, जो इस हमले में इस्तेमाल किए गए थे।
ऑपरेशन सिंदूर: सीमा पार ‘आतंक की फैक्ट्री’ पर प्रहार
भारत ने इस बार केवल घाटी तक सीमित रहने के बजाय आतंक की जड़ पर प्रहार करने का फैसला किया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय वायुसेना और स्पेशल फोर्सेस ने सीमा पार (PoK) सक्रिय लॉन्च पैड्स को निशाना बनाया।
- सर्जिकल स्ट्राइक 3.0: सैटेलाइट इमेजरी के जरिए उन कैंपों की पहचान की गई जहां पहलगाम हमले की साजिश रची गई थी।
- लॉन्च पैड्स का विनाश: रात के अंधेरे में किए गए इस ऑपरेशन में एलओसी के पार कम से कम 5 प्रमुख आतंकी ठिकाने तबाह कर दिए गए। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें 100 से अधिक आतंकी और उनके प्रशिक्षक मारे गए।
- स्पष्ट संदेश: इस ऑपरेशन का नाम ‘सिंदूर’ उन महिलाओं के सम्मान में रखा गया था जिन्होंने इस हमले में अपने सुहाग और बेटों को खोया था।
तबाही का शिकार हुए प्रमुख एयरबेस
भारतीय वायुसेना (IAF) ने 10 मई 2025 की सुबह ब्रह्मोस, स्कैल्प-ईजी (SCALP-EG) और रैम्पेज मिसाइलों के जरिए पाकिस्तान के अंदर गहरी स्ट्राइक की थी। इन एयरबेसों के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को निशाना बनाया गया था ताकि पाकिस्तान की जवाबी हमला करने की शक्ति को ‘बेअसर’ किया जा सके।
नूर खान एयरबेस (Nur Khan Air Base)
यह रावलपिंडी में स्थित पाकिस्तान का सबसे रणनीतिक एयरबेस है। भारतीय ड्रोन और मिसाइल हमलों में यहाँ का कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, रनवे और फ्यूल ट्रकों को भारी नुकसान पहुँचा था। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि यहाँ अभी भी मरम्मत का काम चल रहा है और पाकिस्तान यहाँ विमानों को छिपाने के लिए नए ‘हार्डन्ड हैंगर’ बना रहा है।
मुरीद एयरबेस (Murid Air Base):
यह पाकिस्तान के ड्रोन बेड़े का मुख्य केंद्र था। यहाँ के ड्रोन हैंगर और कंट्रोल फैसिलिटी को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था, जिससे पाकिस्तान की निगरानी क्षमता (ISR) को बड़ा झटका लगा।
रफीकी, सुक्कुर और रहीम यार खान एयरबेस:
इन एयरबेसों के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को निशाना बनाया गया था ताकि पाकिस्तान की जवाबी हमला करने की शक्ति को ‘बेअसर’ किया जा सके।


