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    स्वदेशी AI से लैस सैटेलाइट सिस्टम ‘प्रज्ञा’, घुसपैठ और खतरों से निपटने में होगा गेमचेंजर

    भारत की आंतरिक सुरक्षा और सीमा निगरानी को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। DRDO ने पूर्णतः स्वदेशी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस इमेजिंग सैटेलाइट सिस्टम ‘प्रज्ञा’ (PRAGYA) गृह मंत्रालय को सौंप दिया है। यह प्रणाली देश की सीमाओं पर घुसपैठ और आंतरिक खतरों से निपटने में गेम-चेंजर साबित होगी।

    ‘प्रज्ञा’ सिस्टम की मुख्य विशेषताएं:

    • AI आधारित निगरानी: यह सिस्टम केवल तस्वीरें नहीं लेता, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण भी करता है। यह स्वतः ही उन बदलावों की पहचान कर सकता है जो मानवीय आंखों से ओझल हो सकते हैं।
    • उच्च गुणवत्ता वाली इमेजरी: ‘प्रज्ञा’ उपग्रह के माध्यम से प्राप्त होने वाली तस्वीरें अत्यंत उच्च रेजोल्यूशन की होती हैं, जिससे घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और दुर्गम क्षेत्रों में छिपे ठिकानों का पता लगाना आसान होगा।
    • रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग: यह सिस्टम केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और सीमा सुरक्षा बलों (BSF/ITBP) के साथ रीयल-टाइम डेटा साझा करेगा, जिससे किसी भी खतरे की स्थिति में त्वरित जवाबी कार्रवाई की जा सकेगी।

    आंतरिक सुरक्षा के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?

    गृह मंत्रालय को इस प्रणाली के मिलने से भारत की सुरक्षा रणनीति में निम्नलिखित बदलाव आएंगे:

    1. सीमा पर घुसपैठ पर लगाम: पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं पर घुसपैठ की कोशिशों को यह सिस्टम शुरू होने से पहले ही भांप लेगा।
    2. नक्सलवाद और आतंकवाद के खिलाफ: दुर्गम इलाकों में छिपे नक्सलियों और आतंकियों की गतिविधियों को ट्रैक करना अब अधिक सटीक होगा।
    3. तटीय सुरक्षा: भारत की विशाल समुद्री सीमा की निगरानी के लिए भी इस उपग्रह प्रणाली का उपयोग किया जा सकता है।

    आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम:

    ‘प्रज्ञा’ का विकास पूरी तरह से भारत में किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के संकल्प को मजबूत करता है। गृह मंत्रालय ने इस तकनीक को अपनाने के साथ ही सुरक्षा बलों के डिजिटल आधुनिकीकरण पर जोर दिया है।

    DRDO प्रमुख ने इस अवसर पर कहा कि ‘प्रज्ञा’ न केवल एक इमेजिंग सिस्टम है, बल्कि यह भविष्य की ‘इंटेलिजेंट मॉनिटरिंग’ की नींव है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह अंतरिक्ष आधारित जासूसी और टोही क्षमताओं (Space-based ISR capabilities) में भारत को अग्रणी देशों की श्रेणी में खड़ा कर देगा।

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