दक्षिण एशिया की भू-राजनीति और अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को लेकर एक बार फिर वाशिंगटन के गलियारों में बहस तेज हो गई है। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ माइकल रुबिन ने ट्रंप प्रशासन को पाकिस्तान और उसके सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। रुबिन का मानना है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा पाकिस्तान को किसी भी क्षेत्रीय विवाद में ‘मध्यस्थ’ बनाना एक बड़ी रणनीतिक भूल साबित हो सकती है।
‘जीत के मुंह से हार छीनने’ जैसा कदम
माइकल रुबिन ने तर्क दिया है कि अमेरिकी विदेश नीति में पाकिस्तान को बार-बार मध्यस्थ के रूप में शामिल करना “जीत के मुंह से हार छीनने” (Snatching defeat from the jaws of victory) जैसा है। उनका कहना है कि अतीत में पाकिस्तान ने मध्यस्थता के नाम पर केवल अपने स्वार्थ साधे हैं और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाया है।
जनरल असीम मुनीर पर सवाल
रुबिन ने विशेष रूप से पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की भूमिका पर सवाल उठाए हैं:
- तालिबान और आतंकवाद: विशेषज्ञ का आरोप है कि मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना अभी भी अफगानिस्तान में सक्रिय उग्रवादी समूहों और भारत विरोधी आतंकियों के साथ ‘दोहरा खेल’ खेल रही है।
- ईरान से संबंध: हालिया खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए रुबिन ने चेतावनी दी कि मुनीर गुप्त रूप से ईरान के साथ सैन्य और तकनीकी सहयोग बढ़ा रहे हैं, जो ट्रंप की ईरान-विरोधी नीति के बिल्कुल विपरीत है।
ट्रंप को दी गई सलाह
माइकल रुबिन ने आगामी ट्रंप प्रशासन को कुछ सख्त सुझाव दिए हैं। ट्रंप को पाकिस्तान की ‘दोहरी नीति’ से सावधान रहना चाहिए और उसे एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार के रूप में नहीं देखना चाहिए। पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य सहायता और कूटनीतिक छूट पर तब तक रोक लगानी चाहिए जब तक कि वे आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई न करें। रुबिन का सुझाव है कि अमेरिका को दक्षिण एशिया में केवल भारत को ही अपना प्रमुख और विश्वसनीय लोकतंत्र सहयोगी मानना चाहिए।
राजनीतिक प्रभाव
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान आर्थिक तंगी के बीच अमेरिका से समर्थन की उम्मीद कर रहा है। माइकल रुबिन जैसे प्रभावशाली विशेषज्ञों के ये बयान ट्रंप प्रशासन की ‘साउथ एशिया पॉलिसी’ को प्रभावित कर सकते हैं। यदि ट्रंप इन सुझावों पर अमल करते हैं, तो जनरल असीम मुनीर और पाकिस्तानी सेना के लिए आने वाले दिन काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, जिससे इस्लामाबाद पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ेगा।


