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    महिला आरक्षण बिल पर राजनीति तेज, भाजपा ने कहा-कांग्रेस की है ‘सामंती सोच’

    महिला आरक्षण और महिलाओं के सम्मान को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और विशेष रूप से प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, रविशंकर प्रसाद और स्मृति ईरानी ने तीखे सवाल दागते हुए कांग्रेस की विचारधारा पर प्रहार किया है।


    भाजपा का तीखा हमला: ‘सामंती सोच’ का आरोप

    केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए उनकी मानसिकता को ‘सामंती’ करार दिया। उन्होंने प्रियंका गांधी के पुराने बयानों और कांग्रेस की कार्यशैली का हवाला देते हुए पूछा कि क्या विपक्षी दल के लिए महिलाएं केवल राजनीति और वोट बैंक के इस्तेमाल का विषय हैं?

    • स्मृति ईरानी का प्रहार: ईरानी ने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक महिला आरक्षण बिल को लटकाए रखा, जबकि मोदी सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए इसे वास्तविकता में बदला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल नारों तक सीमित है, जबकि भाजपा धरातल पर सशक्तिकरण कर रही है।
    • रविशंकर प्रसाद के सवाल: पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सुर मिलाते हुए पूछा कि जब संसद में महिलाओं के हक की बात आती है, तो कांग्रेस का रवैया दोहरा क्यों हो जाता है?

    महिला आरक्षण बिल पर राजनीति तेज

    भाजपा नेताओं का यह हमला उस समय आया है जब देश में महिला आरक्षण के कार्यान्वयन को लेकर चर्चा गर्म है। भाजपा इसे अपनी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे ‘चुनावी जुमला’ बताकर ओबीसी कोटे की मांग कर रही है।

    मुख्य विवाद के बिंदु:

    1. उपयोग बनाम सशक्तिकरण: भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस महिलाओं का उपयोग केवल रैलियों और विज्ञापनों में ‘उपभोग की वस्तु’ की तरह करती है, न कि उन्हें नीति निर्धारण में बराबर का हिस्सा देने के लिए।
    2. देरी का इतिहास: रविशंकर प्रसाद ने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के दौरान महिला आरक्षण बिल कभी लोकसभा की दहलीज पार नहीं कर पाया।
    3. प्रियंका गांधी की भूमिका: भाजपा नेताओं ने प्रियंका गांधी के ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान पर सवाल उठाते हुए इसे केवल एक राजनीतिक स्टंट बताया।

    भाजपा इस मुद्दे के जरिए महिला मतदाताओं के बीच अपनी पैठ और मजबूत करना चाहती है। पार्टी का स्पष्ट संदेश है कि मोदी सरकार ने महिलाओं को केवल ‘लाभार्थी’ नहीं, बल्कि ‘नेतृत्वकर्ता’ बनाने का काम किया है। स्मृति ईरानी और रविशंकर प्रसाद के इन बयानों ने आने वाले चुनावों के लिए एक बड़ी राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जहां महिला सशक्तिकरण का मुद्दा केंद्र में रहने वाला है।

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