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    ईरान का होर्मुज खोलने का ऐलान, सरकारी मीडिया ने उठाए सवाल

    दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक बार फिर भ्रम और विवाद की स्थिति बन गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची द्वारा जलमार्ग को पूरी तरह खोलने के ऐलान के बाद अब ईरान के भीतर ही सरकारी मीडिया ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

    क्या है पूरा विवाद?

    शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर घोषणा की थी कि लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच हुए 10 दिवसीय युद्धविराम के मद्देनजर होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए “पूरी तरह खोल दिया गया है।” हालांकि, इस घोषणा के कुछ ही घंटों बाद ईरान के सरकारी मीडिया और कट्टरपंथी हलकों में इस फैसले पर संशय व्यक्त किया जाने लगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार:

    • अराघची के अधिकार पर सवाल: सरकारी मीडिया का एक धड़ा यह तर्क दे रहा है कि जलमार्ग खोलने का फैसला रणनीतिक और सैन्य प्रकृति का है, जिसे विदेश मंत्रालय अकेले नहीं ले सकता।
    • अमरीकी नाकेबंदी का तर्क: ईरान के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि जब अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी भी ईरानी जहाजों पर ‘पूर्ण नाकेबंदी’ (Blockade) जारी रखने की बात कही है, तो ईरान ने एकतरफा रास्ता क्यों खोला?

    डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया

    अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के इस कदम का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही अपनी शर्तें भी स्पष्ट कर दीं। उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “होर्मुज जलडमरूमध्य अब व्यापार के लिए खुला है, लेकिन ईरानी जहाजों और बंदरगाहों पर अमरीकी नौसेना की नाकेबंदी तब तक प्रभावी रहेगी जब तक ईरान के साथ हमारा ‘लेन-देन’ 100% पूरा नहीं हो जाता।”

    बाजार पर असर

    रास्ता खुलने की खबर मिलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 9% तक गिरकर $90 के करीब आ गईं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी थी।

    ईरान के भीतर अराघची के फैसले का विरोध यह दर्शाता है कि वहां की सरकार और सैन्य नेतृत्व (विशेषकर IRGC) के बीच मतभेद गहरे हैं। यदि सरकारी मीडिया के ये दावे सही साबित होते हैं और रास्ता फिर से बंद किया जाता है, तो तेल की कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है। फिलहाल, जहाजों की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

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