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    ईरान पर चौतरफा हमला, 17 रिहायशी इलाके निशाने पर, इस्राइल पर भी मिसाइलों की बौछार

    ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच चल रहा संघर्ष अब एक पूर्ण और विनाशकारी युद्ध का रूप ले चुका है। 7 अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिमी देशों की सेनाओं ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों के साथ-साथ रिहायशी इलाकों को भी निशाना बनाया है, जिसके जवाब में ईरान ने भी भीषण मिसाइल हमला किया है।


    खोर्रमाबाद और 17 रिहायशी इलाके निशाने पर

    अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं ने ईरान के भीतर हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ा दी है।

    • हवाई अड्डे पर हमला: ईरान के खोर्रमाबाद (Khorramabad) हवाई अड्डे पर भीषण बमबारी की गई है। इस हमले का उद्देश्य ईरान की वायु सेना की रसद और परिवहन क्षमता को पंगु बनाना है।
    • रिहायशी इलाकों में तबाही: रिपोर्ट के अनुसार, केवल सैन्य ठिकाने ही नहीं, बल्कि 17 रिहायशी इलाकों पर भी मिसाइलें गिरी हैं। इससे नागरिक हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका है, जिससे मानवीय संकट गहरा गया है।
    • बुनियादी ढांचे को नुकसान: कई शहरों में बिजली ग्रिड और संचार केंद्रों को भी निशाना बनाया गया है, जिससे बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हो गई है।

    ईरान का पलटवार: इस्राइल पर मिसाइलों की बौछार

    ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन हमलों का जवाब देने में देर नहीं की। ईरान ने अपनी भूमि से इस्राइल के प्रमुख शहरों और सैन्य अड्डों की ओर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। यरुशलम और तेल अवीव जैसे शहरों में हवाई हमले के सायरन गूंज रहे हैं। हालाँकि इस्राइल का ‘आयरन डोम’ और ‘एरो’ डिफेंस सिस्टम सक्रिय है, लेकिन मिसाइलों की भारी संख्या ने चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके रिहायशी इलाकों पर हमले बंद नहीं हुए, तो वह अपने हमले और तेज करेगा।


    ‘पावर प्लांट डे’ का बढ़ता खतरा

    यह संघर्ष ऐसे समय में तेज हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अल्टीमेटम प्रभावी होने वाला है।

    • 10 अप्रैल की समयसीमा: ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान ने समझौता नहीं किया, तो 10 अप्रैल को “पावर प्लांट डे” के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें ईरान के सभी प्रमुख बिजली केंद्रों और पुलों को नष्ट कर दिया जाएगा।
    • होर्मुज की नाकेबंदी: ईरान अभी भी स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद करने की अपनी धमकी पर कायम है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने का खतरा मंडरा रहा है।

    वैश्विक प्रभाव और मानवीय संकट

    • ईंधन की कीमतें: युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं, जिसका असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
    • पलायन: ईरान के प्रभावित इलाकों से बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

    ईरान-इस्राइल युद्ध अब उस मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी कठिन नजर आ रही है। दोनों पक्षों की ओर से बढ़ती आक्रामकता ने न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया को एक अनिश्चित भविष्य की ओर धकेल दिया है।

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