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    होर्मुज पर स्थिति पहले जैसी कभी नहीं होगी, IRGC ने अपनाया कड़ा रुख

    होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कड़े रुख और इराकी सशस्त्र समूहों की नई धमकियों ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिरता पर संकट के बादल और गहरे कर दिए हैं।

    ईरानी नौसेना का ‘नो-रिटर्न’ अल्टीमेटम

    ईरानी नौसेना के वरिष्ठ कमांडरों ने स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति अब “पहले जैसी कभी नहीं होगी”। ईरान का तर्क है कि अमेरिका और इस्राइल की क्षेत्रीय गतिविधियों ने सुरक्षा समीकरणों को हमेशा के लिए बदल दिया है।

    • रणनीतिक नियंत्रण: ईरान ने संकेत दिया है कि वह इस जलमार्ग पर अपना निरीक्षण और नियंत्रण और सख्त करेगा।
    • पश्चिमी देशों को चेतावनी: ईरानी अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में विदेशी ताकतों की मौजूदगी ही तनाव की मुख्य जड़ है और अब वे इस मार्ग का उपयोग अपनी शर्तों पर नहीं कर पाएंगे।

    इराकी संगठनों की सीधी धमकी

    ईरान समर्थित इराकी संगठन कतैब हिजबुल्ला ने भी इस विवाद में कूदते हुए अमेरिका और इस्राइल को सीधी चेतावनी दी है।

    • ऊर्जा ठिकानों पर हमला: संगठन ने धमकी दी है कि यदि ईरान पर कोई भी हमला होता है या क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो वे खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और तेल पाइपलाइनों को निशाना बनाएंगे।
    • क्षेत्रीय एकजुटता: यह बयान दर्शाता है कि ईरान अकेले नहीं है, बल्कि उसके समर्थित ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ के अन्य गुट भी सक्रिय हो गए हैं।

    वैश्विक चिंताएं और प्रभाव

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ है। यहाँ से प्रतिदिन लगभग 21 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरता है।

    • तेल की कीमतें: इस रार के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें पहले ही 110 डॉलर के पार जा चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई छोटी सी सैन्य झड़प भी होती है, तो कीमतें 150 डॉलर तक पहुंच सकती हैं।
    • आपूर्ति श्रृंखला: केवल तेल ही नहीं, बल्कि वैश्विक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का एक बड़ा हिस्सा भी इसी मार्ग से गुजरता है, जिससे यूरोप और एशिया में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।
    • ईरान और उसके सहयोगियों का यह आक्रामक रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘डेडलाइन’ के जवाब में देखा जा रहा है। कूटनीतिक गलियारों में डर है कि यह जुबानी जंग जल्द ही एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकती है, जिसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा।
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