ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। भारत का सातवां एलपीजी (LPG) टैंकर ‘ग्रीन शान्वी’ (Green Sanvi) सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित पार कर गया है।
सुरक्षित पारगमन और ऊर्जा आपूर्ति
पिछले कुछ हफ्तों से फारस की खाड़ी में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय जहाजों का आवागमन बाधित था। ऐसे में ‘ग्रीन शान्वी’ का सुरक्षित निकलना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है:
- सातवां सफल टैंकर: यह पिछले 10 दिनों में होर्मुज को पार करने वाला सातवां भारतीय एलपीजी जहाज है।
- गैस संकट से राहत: देश में रसोई गैस की बढ़ती किल्लत और लंबी कतारों के बीच, इस टैंकर के भारत पहुँचने से आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में सुधार होने की उम्मीद है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘चोक पॉइंट’ (Choke Point) है, जहाँ से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20% व्यापार होता है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण इस मार्ग पर जहाजों को मार गिराए जाने या जब्त किए जाने का खतरा बना हुआ है। भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत क्षेत्र में तैनात हैं, जो सुरक्षित गलियारा प्रदान करने में मदद कर रहे हैं।
आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव
‘ग्रीन शान्वी’ के सुरक्षित निकलने का सीधा सकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। आपूर्ति सुचारू रहने से घरेलू बाजार में गैस और ईंधन की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के ईरान और अमेरिका दोनों के साथ संतुलित संबंधों के कारण ही भारतीय झंडे वाले जहाजों को इस संकटग्रस्त क्षेत्र में सुरक्षित मार्ग मिल पा रहा है।
‘ग्रीन शान्वी’ का सुरक्षित पारगमन भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और संकट प्रबंधन की क्षमता को दर्शाता है। हालांकि, होर्मुज में स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है, लेकिन लगातार टैंकरों का भारत पहुँचना जनता के लिए बड़ी राहत है। अधिकारियों के अनुसार, अगले कुछ दिनों में दो और टैंकरों के इसी मार्ग से गुजरने की उम्मीद है।


