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    पश्चिमी विक्षोभ से पहाड़ों पर बर्फ की चादर, मैदानी इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि

    उत्तर भारत में मौसम के मिजाज में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सक्रिय हुए ताजा पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी और मैदानी इलाकों में छिटपुट बारिश का दौर शुरू हो गया है। अप्रैल की शुरुआत में आए इस बदलाव ने गर्मी के तेवरों को फिलहाल नरम कर दिया है।

    बर्फबारी से तापमान शून्य से नीचे गया

    हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर की ऊंची चोटियों पर पिछले 24 घंटों से बर्फबारी जारी है।

    • हिमाचल और उत्तराखंड: रोहतांग दर्रा, बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी से तापमान शून्य से नीचे चला गया है।
    • पर्यटन पर असर: अचानक हुई इस बर्फबारी से पर्यटकों के चेहरे खिल उठे हैं, लेकिन लाहौल-स्पीति और चमोली के ऊपरी इलाकों में आवाजाही बाधित हुई है।

    मैदानी इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि

    पश्चिमी विक्षोभ का असर केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में बादल छाए हुए हैं और कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है।

    • तापमान में गिरावट: बारिश और ठंडी हवाओं के कारण मैदानी राज्यों में अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है।
    • अंधड़ और ओले: राजस्थान के कुछ हिस्सों में तेज अंधड़ और ओलावृष्टि की भी खबरें हैं, जिससे फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

    मध्य प्रदेश का हाल

    मध्य प्रदेश में भी इस सिस्टम का असर दिखाई दे रहा है। जबलपुर सहित आसपास के जिलों में हवाओं की दिशा बदलने से उमस और गर्मी से कुछ राहत मिली है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों में जबलपुर और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ने की संभावना है। स्थानीय मौसम के कुछ मुख्य बिंदु:

    • आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने से धूप की तपिश कम हुई है।
    • रात के तापमान में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई है।

    खेती पर प्रभाव: किसानों के लिए चेतावनी

    अप्रैल का महीना रबी की फसलों (विशेषकर गेहूं) की कटाई और भंडारण का होता है। ऐसे समय में बारिश और ओलावृष्टि किसानों के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों या मंडियों में ढककर रखें। नमी की वजह से दाने काले न पड़ें, इसके लिए उचित वेंटिलेशन का ध्यान रखें।

      मौसम विभाग का पूर्वानुमान

      आईएमडी (IMD) के अनुसार, यह पश्चिमी विक्षोभ अगले 2 से 3 दिनों तक सक्रिय रह सकता है। 3 अप्रैल के बाद मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगेगा, जिसके बाद तापमान में एक बार फिर तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है। फिलहाल, उत्तर और मध्य भारत के लोगों को भीषण लू (Heatwave) से कम से कम एक हफ्ते की राहत मिल गई है।

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