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    ईरान अब समझौते के लिए तैयार, ट्रंप ने किया दावा, कहा-मिला महंगा तोहफा

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक दावा किया है। वाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने संकेत दिया कि तेहरान अब समझौते के लिए तैयार है और उसने परमाणु हथियार न रखने की मुख्य शर्त मान ली है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ओवल ऑफिस में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान अब समझौते के लिए बहुत उत्सुक है। उनके प्रमुख बयानों की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

    • परमाणु हथियारों पर सहमति: ट्रंप के अनुसार, किसी भी समझौते की पहली तीन शर्तें यही हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। उन्होंने दावा किया कि ईरान इस बात पर सहमत हो गया है कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु बम नहीं बनाएगा।
    • “महंगा तोहफा” और हॉर्मुज जलडमरूमध्य: ट्रंप ने एक “बड़े तोहफे” (Very big present) का जिक्र किया जो उन्हें ईरान की ओर से मिला है। हालांकि उन्होंने इसकी पूरी व्याख्या नहीं की, लेकिन इसे हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और तेल-गैस की आपूर्ति से जोड़ा। माना जा रहा है कि ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही को लेकर कोई बड़ी रियायत दी है।
    • सक्रिय बातचीत: ट्रंप ने पुष्टि की कि अमेरिका और ईरान के बीच इस समय “सक्रिय बातचीत” चल रही है। इस कूटनीतिक प्रयास में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर जैसे शीर्ष अधिकारी शामिल हैं।

    युद्ध विराम और पांच दिन की मोहलत

    यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले हमलों को पांच दिनों के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने इसे एक “अवसर” बताया है ताकि बातचीत के जरिए किसी ठोस नतीजे पर पहुँचा जा सके। उन्होंने आत्मविश्वास जताते हुए कहा, “वे (ईरानी नेता) अब समझदारी की बात कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उनकी सैन्य क्षमताएं काफी हद तक कमजोर हो चुकी हैं।”

    ईरान का रुख और वैश्विक स्थिति

    एक तरफ जहां ट्रंप समझौते की उम्मीद जता रहे हैं, वहीं ईरानी अधिकारियों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर सीधी बातचीत की पुष्टि नहीं की है। हालांकि, कतर, तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश इस तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रपति ट्रंप से फोन पर बात कर पश्चिम एशिया में शांति और समुद्री सुरक्षा (हॉर्मुज) सुनिश्चित करने पर चर्चा की है।

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