ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) एक खतरनाक युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, खाड़ी के इस संकरे रास्ते में 22 भारतीय व्यापारिक जहाज फंस गए हैं। इन जहाजों पर सैकड़ों भारतीय क्रू मेंबर्स सवार हैं और करोड़ों का कच्चा तेल और माल लदा हुआ है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार और भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने इन जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एक अत्यंत गोपनीय और रणनीतिक ‘सेक्रेट प्लान’ पर काम शुरू कर दिया है।
नौसेना का ‘ऑपरेशन सुरक्षा’ और अलर्ट मोड
हिंद महासागर से लेकर फारस की खाड़ी तक भारतीय नौसेना के सबसे शक्तिशाली युद्धपोत तैनात कर दिए गए हैं:
- युद्धपोतों की तैनाती: आईएनएस कोलकाता (INS Kolkata) और आईएनएस चेन्नई (INS Chennai) जैसे विध्वंसक जहाजों को होर्मुज की खाड़ी के मुहाने पर तैनात किया गया है।
- हवाई निगरानी: नौसेना के P-8I समुद्री गश्ती विमान और एमक्यू-9बी (MQ-9B) प्रेडेटर ड्रोन लगातार खाड़ी के ऊपर उड़ान भर रहे हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या मिसाइल हमले का पहले ही पता लगाया जा सके।
- कमांडो यूनिट्स: रिपोर्टों के अनुसार, नौसेना के विशेष कमांडो (MARCOS) को भी अलर्ट पर रखा गया है, जो किसी भी आपात स्थिति में जहाजों पर उतरकर उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं।
क्यों फँसे हैं भारतीय जहाज?
ईरान और इजरायल के बीच जारी ‘छाया युद्ध’ (Shadow War) अब खुले संघर्ष में बदल चुका है।
- रास्ते की नाकेबंदी: ईरान ने चेतावनी दी है कि वह होर्मुज की खाड़ी को बंद कर सकता है, जहाँ से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है।
- मिसाइल और ड्रोन का खतरा: क्षेत्र में तैनात अमेरिकी और ब्रिटिश ठिकानों पर हुए हमलों (जैसे डिएगो गार्सिया की घटना) के बाद इस मार्ग पर व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बढ़ गया है।
- बीमा और सुरक्षा: अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों का प्रीमियम बढ़ा दिया है, जिससे कई जहाज बीच रास्ते में ही रुकने को मजबूर हैं।
भारत का ‘सेक्रेट प्लान’ क्या है?
रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारत इस मिशन के लिए ‘साइलेंट एस्कॉर्ट’ तकनीक का उपयोग कर सकता है:
- भारतीय युद्धपोत इन व्यापारिक जहाजों को एक ‘सुरक्षित कॉरिडोर’ के जरिए अंतरराष्ट्रीय जल सीमा तक सुरक्षित पहुंचाएंगे।
- भारत इस मुद्दे पर तेहरान और तेल अवीव दोनों के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर रहा है ताकि ‘भारतीय झंडे’ वाले जहाजों को निशाना न बनाया जाए।
वैश्विक तेल संकट का डर
अगर यह गतिरोध लंबा खिंचता है, तो भारत सहित पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है।


