देश में बढ़ती ‘रीलबाजी’ की प्रवृत्ति पर नेशनल क्राइम इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (NCIB) ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक तीखी और चिंताजनक प्रतिक्रिया साझा की है। NCIB मुख्यालय के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से पोस्ट करते हुए कहा गया, “देश में रीलबाजी का नशा अगर ऐसे ही बढ़ता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब सरकार को ‘रील मुक्त भारत अभियान’ चलाना पड़ेगा।”
इस वीडियो में एक महिला चलती स्कूटी की डिग्गी (Storage space) को खोलकर उसमें एक छोटे बच्चे को लिटाकर ले जाती हुई नजर आ रही है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि बच्चा डिग्गी के अंदर लेटा हुआ है और स्कूटी सड़क पर चल रही है।
यह दृश्य न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि लापरवाही की पराकाष्ठा है। स्कूटी की डिग्गी में बच्चे को लिटाना उसकी जान के साथ बड़ा खिलवाड़ है क्योंकि:
- दम घुटने का डर: डिग्गी जैसी बंद जगह में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है।
- दुर्घटना की संभावना: जरा सा संतुलन बिगड़ने पर बच्चा बाहर गिर सकता है या उसे गंभीर चोट लग सकती है।
- इंजन की गर्मी: डिग्गी के ठीक नीचे इंजन होता है, जिससे वह हिस्सा काफी गर्म हो जाता है।
NCIB की टिप्पणी: इस वीडियो को शेयर करते हुए NCIB ने “रीलबाजी के नशे” पर कड़ा प्रहार किया है। उनका कहना है कि व्यूज और फॉलोअर्स पाने की चाहत में लोग अपने बच्चों की सुरक्षा तक को ताक पर रख रहे हैं। यह वीडियो एक चेतावनी है कि रील बनाने का यह पागलपन किस हद तक संवेदनहीन और खतरनाक हो चुका है।
प्रमुख चिंताएं और प्रभाव
NCIB की यह टिप्पणी उन बढ़ती घटनाओं की ओर इशारा करती है, जहाँ लोग सोशल मीडिया पर चंद लाइक्स और व्यूज के लिए अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
- कानूनी उल्लंघन: कई युवा सार्वजनिक स्थानों पर यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए और हथियारों (नकली या असली) का प्रदर्शन करते हुए रील बना रहे हैं, जिससे सामाजिक शांति भंग हो रही है।
- मानसिक स्वास्थ्य: विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वायरल’ होने की होड़ युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवहार को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही है।
NCIB की यह चेतावनी एक संकेत है कि भविष्य में सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रील बनाने से संबंधित नियमों को और अधिक कड़ा किया जा सकता है। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर लोग मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।


