देश में इन दिनों मौसम का दोहरा मिजाज देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर हिमालयी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से लोगों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर देश के मैदानी और मध्य भागों में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है।
पहाड़ों पर मौसम का हाल
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी का दौर जारी है। इससे पिछले कुछ दिनों से बनी गर्मी की स्थिति में अस्थायी राहत मिली है। हालांकि, मौसम विभाग ने इन पहाड़ी राज्यों में आने वाले दिनों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना भी जताई है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को ऊंचे पहाड़ी रास्तों पर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी
पहाड़ों के विपरीत, मैदानी क्षेत्रों में मार्च के महीने में ही गर्मी ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र (विदर्भ क्षेत्र) और मध्य प्रदेश के कई शहरों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जो सामान्य से काफी अधिक है।
अत्यधिक तापमान के कारण कई राज्यों में ‘हीटवेव’ (लू) जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के अन्य मैदानी इलाकों में भी अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जिससे दोपहर के समय लोगों को भारी उमस और चिलचिलाती धूप का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल फरवरी और मार्च की शुरुआत पिछले वर्षों की तुलना में काफी गर्म रही है, जिससे गर्मी का सीजन जल्दी शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे दोपहर के समय घर से बाहर निकलते समय सावधानी बरतें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। आने वाले दिनों में भी मैदानी इलाकों में तापमान में बड़ी गिरावट के आसार कम हैं, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में 15 मार्च तक मौसम का उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।


