ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ा युद्ध एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने स्पष्ट कर दिया है कि वे न केवल इस युद्ध को लंबा खींचने के लिए तैयार हैं, बल्कि उनके पास ऐसे घातक हथियार हैं जिनका इस्तेमाल अभी तक नहीं किया गया है।
IRGC का ‘लंबे युद्ध’ का संकल्प
IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नायनी ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि ईरान किसी भी तरह के दीर्घकालिक संघर्ष के लिए पूरी तरह सुसज्जित है। ईरान की योजना दुश्मन को ‘थका देने’ (War of Attrition) की है। उनका मानना है कि अमेरिका और इजरायल लंबे समय तक इस तीव्रता के युद्ध को झेल नहीं पाएंगे। नायनी ने चेतावनी दी कि ईरान “आक्रामक शक्तियों को दंडित” करने के लिए तैयार है और आगामी हर हमले में दुश्मन को “दर्दनाक चोट” मिलेगी।
‘अनदेखे’ और नए हथियारों की चेतावनी
ईरान ने पहली बार अपने सैन्य शस्त्रागार में मौजूद गोपनीय हथियारों के इस्तेमाल का संकेत दिया है:
- नए आविष्कार: IRGC के अनुसार, उनके नए सामरिक हथियार (Strategic Weaponry) रास्ते में हैं। ये ऐसे सिस्टम हैं जिन्हें अभी तक युद्ध के मैदान में तैनात नहीं किया गया है।
- सीमित उपयोग का दावा: प्रवक्ता ने दावा किया कि अब तक के ऑपरेशनों (जैसे ‘ट्रू प्रॉमिस 4’) में ईरान ने अपनी वास्तविक शक्ति का केवल एक छोटा हिस्सा ही इस्तेमाल किया है।
- हाइपरसोनिक और ड्रोन तकनीक: विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपने उन्नत हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम और ‘आत्मघाती’ ड्रोन्स की नई खेप उतार सकता है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
ईरान की इस चेतावनी के बीच अमेरिकी रक्षा सचिव (Secretary of War) पीट हेगसेथ ने भी कड़ा रुख अपनाया है:
- बड़ी गलती की चेतावनी: हेगसेथ ने कहा कि अगर ईरान को लगता है कि अमेरिका इस सैन्य अभियान को जारी नहीं रख पाएगा, तो यह उनकी “बहुत बड़ी गलतफहमी” है।
- निर्णायक लड़ाई: उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन इस लड़ाई को निर्णायक अंत तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है और उनके पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है।
युद्ध का वर्तमान परिदृश्य
| विवरण | ताजा स्थिति |
| हमलों का दायरा | इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर 26 नए बम गिराए हैं। |
| ईरानी जवाबी हमला | ईरान ने तेल अवीव की ओर ‘खैबर’ (Khayber) मिसाइलें दागी हैं। |
| आर्थिक प्रभाव | अमेरिका इस युद्ध पर लगभग 8,000 करोड़ रुपये प्रतिदिन खर्च कर रहा है। |
| तेल संकट | होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक तेल की कीमतें 14% तक बढ़ गई हैं। |
IRGC का यह बयान मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) का हिस्सा भी हो सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, जिससे एक ‘विश्व युद्ध’ जैसी स्थिति की आशंका गहरा गई है।


