उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को पीलीभीत में रामराज्य की अवधारणा पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि रामराज्य का अर्थ ऐसा शासन है, जिसमें किसी के साथ भेदभाव या तुष्टिकरण न हो। समाज के हर वर्ग को सुरक्षा, सम्मान और न्याय मिले। सरकार की योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के सभी जरूरतमंदों तक पहुंचे। मुख्यमंत्री पीलीभीत के बीसलपुर क्षेत्र के नूरानपुर स्थित श्री शंकर मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद श्रीराम कथा महोत्सव में शामिल हुए।
रामराज्य में सभी के लिए समान व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन और उनका आदर्श शासन व्यवस्था के लिए प्रेरणास्रोत है। रामराज्य में शासक का दायित्व केवल शासन करना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के हितों की रक्षा करना भी है। वहां किसी के साथ जाति, वर्ग या अन्य आधार पर भेदभाव नहीं होता। हर व्यक्ति को सुरक्षा और सम्मान मिलता है।
योगी ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में ऐसी व्यवस्था कायम हो, जहां कानून का राज हो और आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करे। उन्होंने तुष्टिकरण की राजनीति के बजाय सबके लिए समान अवसर और न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया।
श्रीराम कथा महोत्सव में हुए शामिल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पीलीभीत के नूरानपुर स्थित श्री शंकर मंदिर में दर्शन-पूजन करने पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने नौ दिवसीय श्रीराम कथा महोत्सव में भाग लिया। यह आयोजन 26 अक्टूबर से चल रहा था और मंगलवार को इसका समापन हुआ। मुख्यमंत्री ने कथा स्थल पर पहुंचकर धार्मिक कार्यक्रम में सहभागिता की।
इससे पहले मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की थीं। हेलीपैड से मंदिर और कथा स्थल तक सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। आसपास के जिलों से भी पुलिस बल बुलाया गया था।
शासन और रामराज्य की अवधारणा को जोड़ा
योगी आदित्यनाथ अपने संबोधन में रामराज्य को ऐसी शासन व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं, जिसमें गरीबों, वंचितों और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता के साथ कानून व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाती है। पीलीभीत में उनका संदेश भी इसी विचार पर केंद्रित रहा कि शासन का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और किसी के साथ पक्षपात न हो।
मुख्यमंत्री के बयान में रामराज्य को केवल धार्मिक अवधारणा नहीं, बल्कि सुशासन, समानता, सुरक्षा और सामाजिक सम्मान से जुड़ी व्यवस्था के रूप में पेश किया गया।


