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Street Fighter Review: विद्युत जामवाल का एक्शन दमदार, कमजोर स्क्रीनप्ले ने बिगाड़ा खेल

हॉलीवुड फिल्म ‘स्ट्रीट फाइटर’ से भारतीय अभिनेता विद्युत जामवाल ने अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में कदम रखा है। 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म दमदार एक्शन, रंगीन किरदारों और लोकप्रिय वीडियो गेम की दुनिया को बड़े पर्दे पर उतारने की कोशिश करती है। हालांकि, शानदार फाइट सीक्वेंस के बावजूद कमजोर पटकथा और बिखरी कहानी फिल्म के प्रभाव को कम कर देती है।समीक्षा में फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार दिए गए हैं।

क्या है ‘स्ट्रीट फाइटर’ की कहानी?

निर्देशक किताओ सकुराई की यह फिल्म मशहूर जापानी फाइटिंग वीडियो गेम सीरीज पर आधारित है। कहानी 1993 के दौर में सेट है और दो फाइटर दोस्तों र्यू और केन मास्टर्स के इर्द-गिर्द घूमती है। कभी एक साथ मुकाबले करने वाले ये दोनों दोस्त वक्त के साथ अलग हो जाते हैं। केन एक गैर-जिम्मेदार मीडिया सेलिब्रिटी बन चुका है, जबकि र्यू गुमनामी में जिंदगी बिता रहा है।

इसी बीच, तानाशाह एम बाइसन दूसरे वर्ल्ड वॉरियर टूर्नामेंट का एलान करता है। रहस्यमयी चंग-ली दोनों को इस मुकाबले से जोड़ती है। शुरुआत में यह टूर्नामेंट अपनी ताकत साबित करने का मौका लगता है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी साजिश छिपी होती है।

विद्युत जामवाल ने अपने एक्शन से जीता दिल

फिल्म में भारतीय अभिनेता विद्युत जामवाल धालसिम की भूमिका में नजर आते हैं। मार्शल आर्ट में उनकी महारत पर्दे पर दिखाई देती है। सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद वह अपने एक्शन से प्रभावित करते हैं। हालांकि, उनके किरदार को विस्तार नहीं दिया गया है। दर्शकों को यह जानने का पर्याप्त मौका नहीं मिलता कि धालसिम कौन है और उसकी कहानी क्या है।

फिल्म में एंड्रयू कोजी र्यू और नोहा सेंटिनियो केन की भूमिका में हैं। दोनों कलाकार अपने किरदारों के अलग-अलग स्वभाव को पर्दे पर उतारते हैं। कैलिना लियांग चंग-ली और डेविड डास्टमालचैन एम बाइसन के रूप में प्रभाव छोड़ते हैं। जेसन मोमोआ, रोमन रेंस, कोडी रोड्स और रैपर 50 सेंट की मौजूदगी भी फिल्म को आकर्षक बनाती है।

कमजोर स्क्रीनप्ले ने बिगाड़ा खेल

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी बिखरी हुई पटकथा है। कहानी में कई किरदार और उनके ट्रैक एक साथ चलते हैं, लेकिन सभी को पर्याप्त समय नहीं मिलता। कई अहम सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं। खराब एडिटिंग के कारण कुछ घटनाक्रम अचानक सामने आते हैं, जिससे कहानी की निरंतरता प्रभावित होती है।

फाइटिंग गेम के प्रशंसकों को इसके रंगीन कॉस्ट्यूम, मशहूर किरदार और गेम से जुड़े अंदाज पसंद आ सकते हैं। लेकिन जो दर्शक इस गेम की दुनिया से परिचित नहीं हैं, उनके लिए कहानी को समझना मुश्किल हो सकता है।

किसे देखनी चाहिए फिल्म?

‘स्ट्रीट फाइटर’ में एक्शन और मार्शल आर्ट के अच्छे पल हैं, लेकिन कहानी उन पलों को मजबूती नहीं दे पाती। अगर आप विद्युत जामवाल के प्रशंसक हैं या वीडियो गेम की दुनिया में दिलचस्पी रखते हैं, तो फिल्म आपके लिए आकर्षण का केंद्र हो सकती है। हालांकि, मजबूत कहानी और किरदारों के गहरे विकास की उम्मीद लेकर जाने वाले दर्शकों को निराशा हो सकती है।

कुल मिलाकर, ‘स्ट्रीट फाइटर’ में एक्शन का दम है, लेकिन कमजोर कहानी और अधूरे किरदार इसे एक यादगार सिनेमाई अनुभव बनने से रोकते हैं।

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