Narak Chaturdashi 2026: दीपावली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला नरक चतुर्दशी का पर्व आज, 7 नवंबर को मनाया जा रहा है। इसे छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन यमराज के निमित्त दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं छोटी दिवाली पर यम दीपक जलाने की सही दिशा, पूजा विधि और शुभ समय।
किस दिशा में जलाना चाहिए यम दीपक?
नरक चतुर्दशी पर यम दीपक जलाने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यम दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा में जलाना चाहिए। दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है। इस दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार के बाहर दीपक जलाकर यमराज से परिवार की सुख-शांति और लंबी आयु की कामना की जाती है।
परंपरा के अनुसार, यम दीपक जलाते समय दीपक का मुख दक्षिण दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। दीपक जलाने के लिए मिट्टी के दीपक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें सरसों का तेल और रुई की बत्ती रखने की परंपरा है।
नरक चतुर्दशी पर यम दीपक का शुभ समय
छोटी दिवाली पर यम दीपक प्रदोष काल में जलाना शुभ माना जाता है। सूर्यास्त के बाद दीपक जलाने की परंपरा है। हालांकि, पूजा का सटीक मुहूर्त स्थानीय पंचांग और सूर्यास्त के समय के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए श्रद्धालुओं को अपने शहर के पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना चाहिए।
छोटी दिवाली की पूजा विधि
नरक चतुर्दशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति को सौंदर्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनकर भगवान श्रीकृष्ण और यमराज का स्मरण किया जाता है।
शाम के समय घर की साफ-सफाई करके मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। यम दीपक जलाते समय यमराज से परिवार के सभी सदस्यों की रक्षा और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध करके हजारों महिलाओं को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और जीवन में प्रकाश के आगमन का प्रतीक माना जाता है।


