मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा हालात में चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गए हैं। हालांकि, पायलट ने साफ किया कि कांग्रेस सत्ता परिवर्तन के लिए किसी हिंसक रास्ते में विश्वास नहीं करती। उनके मुताबिक, भारत में सरकार बदलने का अधिकार केवल जनता के पास है और यह बदलाव चुनाव के जरिए ही होना चाहिए।
ANI को दिए इंटरव्यू में पायलट ने चुनाव आयोग की तुलना क्रिकेट के अंपायर से की। उन्होंने कहा कि अगर मैच का अंपायर ही पक्षपाती हो तो खेलने का क्या मतलब रह जाता है? उनका आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में लिए गए कुछ फैसलों ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं।
पायलट ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में कथित अनियमितताओं से जुड़े पर्याप्त दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संस्थाओं पर जनता का भरोसा बना रहना जरूरी है। जब किसी संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो उस भरोसे को बहाल करना भी जरूरी हो जाता है। ये आरोप कांग्रेस नेता की ओर से लगाए गए हैं; निर्वाचन आयोग ने अपनी तरफ से इन पर स्पष्टीकरण दिया है।
13.3 करोड़ नामों का मुद्दा उठाया
SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पायलट ने दावा किया कि मतदाता सूची से 13.3 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने इसे नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय बताया। हालांकि, निर्वाचन आयोग के अनुसार SIR के दौरान 13.39 करोड़ मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या दोहरे पंजीकरण जैसी श्रेणियों में चिह्नित किया गया था। इन सभी को हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम मानना सही नहीं होगा। आयोग का कहना है कि प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना है।
CEC की नियुक्ति और कानूनी सुरक्षा पर भी सवाल
पायलट ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में हुए बदलावों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पहले चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि चयन प्रक्रिया से मुख्य न्यायाधीश को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी।
इसके अलावा उन्होंने पद छोड़ने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा पर भी सवाल किया। उनके मुताबिक, इस प्रावधान से आयोग की स्वतंत्रता और जवाबदेही को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं।
सत्ता परिवर्तन पर क्या बोले पायलट?
बांग्लादेश के घटनाक्रम और ‘रेजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन से जुड़े सवाल पर पायलट ने कहा कि भारत का लोकतंत्र मजबूत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस हिंसा का समर्थन नहीं करती और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों में देश में सरकारें जनता की इच्छा और चुनाव के जरिए बदली हैं। कांग्रेस भी इसी लोकतांत्रिक रास्ते पर भरोसा करती है।
INDIA ब्लॉक की रैली से पहले बढ़ी हलचल
पायलट के बयान ऐसे समय आए हैं, जब INDIA ब्लॉक 31 अक्टूबर को CEC के खिलाफ प्रतीकात्मक सार्वजनिक महाभियोग कार्यवाही और एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में SIR के विरोध में रैली आयोजित कर रहा है। विपक्ष चुनाव आयोग से जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है। वहीं, निर्वाचन आयोग अपनी प्रक्रिया का बचाव कर चुका है। इस विवाद का अगला चरण अब विपक्ष की रैली और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।


