मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच जारी विवाद अब और तेज हो गया है। दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की प्रस्तावित रैली से ठीक पहले केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर सवालों की बौछार की। उन्होंने पार्टी से पांच सवाल पूछते हुए चुनावी हार का हिसाब भी मांगा। इनमें सबसे प्रमुख सवाल यह था कि कांग्रेस 2014 में लोकसभा चुनाव क्यों हार गई थी। विपक्ष की रैली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जानी है।
रिजिजू के पांच सवालों में 2014 की हार से लेकर SIR की वैधता तक का मुद्दा
रिजिजू ने कांग्रेस से पूछा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में उसे महज 44 सीटें कैसे मिलीं, जबकि उस समय चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में हुई थी। उनका दूसरा सवाल 2024 के चुनाव नतीजों को लेकर था। उन्होंने पूछा कि जब ज्ञानेश कुमार उस समय मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे, तब कांग्रेस को लगातार तीसरी बार चुनाव में हार का सामना कैसे करना पड़ा?
तीसरे सवाल में उन्होंने कांग्रेस के मौजूदा मुख्यमंत्रियों का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या 2014 से 2026 के बीच बनी सरकारों के लिए पार्टी को इस्तीफा देना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए?
चौथे सवाल में रिजिजू ने मतदाता सूची की शुद्धता का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या अवैध प्रवासियों, मृत व्यक्तियों, दूसरी जगह जा चुके मतदाताओं और एक से अधिक बार दर्ज नामों को सूची से हटाया जाना चाहिए या नहीं? पांचवें सवाल में उन्होंने पूछा कि 1952-56, 1958-61, 1965-66, 1983-84, 1987-88, 1993, 1995 और 2002-04 के दौरान हुए SIR को क्या अवैध माना जाना चाहिए?
रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम पैदा कर रहे हैं। हालांकि, ये सवाल और आरोप मंत्री की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। इनसे चुनावी प्रक्रिया पर उठे विपक्ष के सवाल अपने आप खारिज नहीं होते।
विपक्ष की क्या हैं आपत्तियां?
INDIA ब्लॉक का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं और इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम भी कटने का खतरा है। विपक्ष ने चुनाव आयोग की पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। गठबंधन ने पहले भी मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बहाली और प्रभावी अपील व्यवस्था की मांग की है।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग का पक्ष है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना और मृत, स्थानांतरित तथा दोहरे पंजीकरण वाले नामों की पहचान करना है। आयोग के अनुसार, नोटिस जारी होने का अर्थ अपने आप नाम काटना नहीं है और संबंधित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है।
रैली से पहले व्यापारियों ने भी जताई चिंता
एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली INDIA ब्लॉक की रैली से पहले व्यापारिक संगठनों ने भी चिंता जताई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने विपक्षी नेताओं को पत्र लिखकर रैली दीपावली के बाद कराने की अपील की है। संगठन का कहना है कि त्योहार से पहले का समय कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। उसके मुताबिक, रैली के कारण दिल्ली के 20 प्रमुख बाजारों में व्यापार प्रभावित हो सकता है।
इस तरह SIR का मुद्दा अब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, विपक्ष की राजनीतिक रणनीति और राजधानी के व्यापारिक हितों से भी जुड़ गया है। एक नवंबर की रैली में इन सवालों पर विपक्ष का रुख सामने आने की उम्मीद है।


