अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को लेकर सख्ती बढ़ा रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट समेत कई टेक कंपनियों पर आरोप लगाया है कि वे अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर विदेशी कर्मचारियों के जरिए कम वेतन पर काम करा रही हैं। इसी बीच अमेरिकी सरकार ने भारत की प्रमुख आईटी कंपनियों टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएलटेक समेत कई कंपनियों को स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड से जुड़ी श्रम प्रमाणन प्रक्रिया PERM से निलंबित कर दिया है। हालांकि, TCS ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले से उसकी अमेरिकी भर्ती रणनीति और ग्राहकों के कामकाज पर कोई बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं है। कंपनी ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15 हजार अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की योजना भी दोहराई है।
वेंस ने विदेशी कर्मचारियों को क्यों कहा ‘बंधुआ मजदूर’?
8 अक्टूबर को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेडी वेंस ने H-1B वीजा कार्यक्रम के कथित दुरुपयोग पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने के बाद विदेशी पेशेवरों को नियुक्त कर रही हैं, जिससे अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं।
वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट का उदाहरण देते हुए दावा किया कि कंपनी ने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के साथ बड़ी संख्या में H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड प्रक्रियाओं का लाभ लिया। उन्होंने विदेशी कर्मचारियों को ‘बंधुआ मजदूर’ बताते हुए तर्क दिया कि नियोक्ता से जुड़ी वीजा व्यवस्था के कारण कर्मचारियों के लिए नौकरी बदलना मुश्किल हो सकता है।
हालांकि, ये अमेरिकी प्रशासन के आरोप हैं। H-1B वीजा के जरिए कंपनियां विशेष कौशल वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त कर सकती हैं। इस व्यवस्था के समर्थकों का कहना है कि इससे अमेरिकी कंपनियों को जरूरी तकनीकी विशेषज्ञता मिलती है और नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
किन कंपनियों पर गिरी गाज?
अमेरिकी श्रम विभाग ने PERM कार्यक्रम के तहत नई और लंबित अर्जियों की प्रक्रिया रोकने की घोषणा की है। प्रभावित कंपनियों में TCS, इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएलटेक, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं।
PERM वह श्रम प्रमाणन प्रक्रिया है, जिसके जरिए नियोक्ता को सामान्य तौर पर यह साबित करना होता है कि संबंधित पद के लिए योग्य और इच्छुक अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं तथा विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। यह रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया का एक अहम चरण है।
इस फैसले का मतलब सभी भारतीय पेशेवरों या सभी वीजा पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। इसका सीधा असर संबंधित कंपनियों के जरिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया शुरू करने की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों पर पड़ सकता है। H-1B वीजा अपने आप रद्द नहीं होता, लेकिन कुछ कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास की प्रक्रिया में देरी हो सकती है।
TCS को भरोसा, अमेरिकी भर्ती पर नहीं पड़ेगा असर
अमेरिकी सरकार के फैसले के बाद TCS ने कहा कि पिछले दो वर्षों में उसकी PERM अर्जियां एकल अंक में थीं। इसलिए कंपनी को नहीं लगता कि इस कार्यक्रम पर रोक से उसकी कार्यबल रणनीति या ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर पड़ेगा।
कंपनी ने बताया कि अमेरिका में उसकी भर्ती रणनीति मुख्य रूप से स्थानीय प्रतिभाओं को रोजगार देने पर केंद्रित है। इसके लिए कैंपस भर्ती और देश में मौजूद अपने कार्यालयों तथा डिलीवरी केंद्रों का इस्तेमाल किया जाता है। TCS ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15 हजार अतिरिक्त लोगों को नौकरी देने की अपनी योजना भी दोहराई है।
भारतीय आईटी कंपनियों और कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
इस फैसले का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कर्मचारी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के किस चरण में है। जिन कर्मचारियों की PERM प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है, उन्हें नई अर्जी दाखिल करने का इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं, जिनकी अर्जियां लंबित हैं, उनकी प्रक्रिया भी निलंबन जारी रहने तक रुक सकती है।
भारतीय पेशेवरों के लिए यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा लंबी हो सकती है। H-1B वीजा सामान्य तौर पर छह साल तक रहने और काम करने की अनुमति देता है, हालांकि कुछ परिस्थितियों में इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। PERM प्रक्रिया में देरी से उन कर्मचारियों की योजना प्रभावित हो सकती है, जो स्थायी निवास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
आईटी कंपनियों को भर्ती, कर्मचारियों की तैनाती और आव्रजन संबंधी नियमों के अनुपालन की रणनीति पर भी ध्यान देना होगा। हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस फैसले से भारतीय आईटी क्षेत्र की अमेरिकी कमाई या रोजगार पर कितना व्यापक असर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, अमेरिकी प्रशासन का कदम विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति और ग्रीन कार्ड प्रायोजन पर बढ़ती निगरानी का संकेत है। TCS ने स्थानीय भर्ती पर जोर देकर भरोसा जताया है, लेकिन भारतीय कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर लगी रोक कितने समय तक जारी रहती है और लंबित मामलों का समाधान कैसे होता है।


