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US ने बुनियादी ढांचे पर की Air Strike, ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर दागे मिसाइल और ड्रोन

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका, ईरान, इस्राइल और खाड़ी देशों के बीच बढ़ता सैन्य तनाव गंभीर रूप लेता जा रहा है। अमेरिकी ठिकानों पर ईरान समर्थित गुटों के हमलों और इसके जवाब में हो रही सैन्य कार्रवाइयों से पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल है। ईरान समर्थित सैन्य समूहों ने इराक और सीरिया में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों (US Bases) पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। जवाब में अमेरिका के मध्य कमान (CENTCOM) ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उससे जुड़े प्रॉक्सी गुटों के बुनियादी ढांचे पर हवाई हमले (Airstrikes) तेज कर दिए हैं।

  1. क्षेत्र में अपनी सुरक्षा प्राथमिकताओं को देखते हुए खाड़ी देशों की सीमा पर भी सैन्य हलचल तेज हुई है। इराक के सीमावर्ती और संदिग्ध चरमपंथी ठिकानों पर हवाई कार्रवाई की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे क्षेत्रीय गुटों में टकराव और गहरा गया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों पर कड़े प्रतिबंध व निगरानी लागू करने की चेतावनी दी है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर: क्रूड ऑयल संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी गतिरोध और खाड़ी देशों में सैन्य टकराव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार बेहद संवेदनशील स्थिति में आ गए हैं:

  • तेल की कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आई है।
  • समुद्री व्यापार पर जोखिम: लाल सागर और फारस की खाड़ी के शिपिंग रूट असुरक्षित होने से जहाजों के लिए बीमा दरें (Insurance Premiums) काफी बढ़ गई हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

कूटनीतिक प्रयास और शांति की चुनौती

संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार युद्धविराम और कूटनीतिक संवाद की अपील कर रहे हैं। हालांकि, ईरान के कड़े रुख और अमेरिकी प्रशासन की सख्त जवाबी नीति के कारण तत्काल शांति की संभावनाएं धुंधली दिख रही हैं। खाड़ी देशों के बीच बढ़ रही सैन्य गतिविधियां इस संकट को बहुराष्ट्रीय संघर्ष में बदलने का जोखिम बढ़ा रही हैं।

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