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ट्रंप का पुतिन से बढ़ा याराना, रूसी तेल-गैस पर प्रतिबंधों में छूट से भारत को राहत की आस

रूस से तेल और गैस खरीदने को लेकर भारत पर दबाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में बदलाव की खबर सामने आई है। रूसी ऊर्जा खरीद पर प्रतिबंधों और टैरिफ में छूट से भारत को राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। रूस से ऊर्जा खरीद भारत की जरूरतों और उसकी आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा रही है।

हालांकि, प्रतिबंधों में छूट की शर्तें, उसकी अवधि और भारत पर लागू होने वाले टैरिफ का वास्तविक दायरा समझना जरूरी है। इन बिंदुओं के स्पष्ट होने के बाद ही इसके आर्थिक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

100 फीसदी टैरिफ लगाने का था प्रावधान

अमेरिका में सितंबर 2026 में लागू किए गए ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026’ के तहत रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर कड़े आर्थिक कदम उठाने का प्रावधान था। इस कानून के तहत रूस के पांच सबसे बड़े तेल और गैस खरीदार देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता था। भारत और चीन भी इस प्रावधान के दायरे में आ सकते थे।

ट्रंप ने 16 अक्टूबर को जारी कार्यकारी आदेश के जरिए कानून के तहत निर्धारित शुल्कों और कई प्रतिबंधात्मक प्रावधानों को फिलहाल लागू करने से छूट दे दी। उन्होंने इस फैसले को अमेरिकी राष्ट्रीय हित में बताया। यह आदेश उन उपायों के प्रभावी होने से ठीक पहले आया, जिनसे भारत के अमेरिकी बाजार में निर्यात पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता था।

भारत को कैसे मिलेगी राहत?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। रूस से मिलने वाला कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए महत्वपूर्ण रहा है। यदि अमेरिका भारत पर रूस से तेल खरीदने के कारण अतिरिक्त टैरिफ लगाता, तो इसका असर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों और भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता था।

अब नए कानून के तहत प्रस्तावित शुल्कों से मिली छूट ने तत्काल टैरिफ संकट को टाल दिया है। इससे भारत को रूस से ऊर्जा खरीदने के विकल्प पर विचार करने के लिए अधिक गुंजाइश मिल सकती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि रूस से जुड़े सभी पुराने अमेरिकी प्रतिबंध समाप्त हो गए हैं। कार्यकारी आदेश में पहले से लागू कुछ प्रतिबंधों को बरकरार रखा गया है।

ऊर्जा संकट भी है फैसले की अहम वजह

अमेरिका के इस कदम के पीछे वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे हालात में रूसी तेल की आपूर्ति पर अतिरिक्त अंकुश से वैश्विक बाजार में कीमतें और बढ़ने की आशंका हो सकती है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने भी बढ़ती तेल कीमतों के जोखिम को ध्यान में रखा है।

क्या भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का रास्ता खुलेगा?

टैरिफ संबंधी प्रावधानों पर रोक से भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता को भी कुछ राहत मिल सकती है। हाल के महीनों में रूस से तेल खरीदने का मुद्दा दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में तनाव का कारण रहा है। हालांकि, इस फैसले से व्यापार समझौता जल्द पूरा होने की पुष्टि नहीं होती।

भारत के सामने एक दूसरी चुनौती भी है। चीन की ओर से रूसी कच्चे तेल की बढ़ती मांग के कारण भारतीय कंपनियों को आपूर्ति हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़ सकती है। ऐसे में अमेरिकी टैरिफ का खतरा फिलहाल टलने के बावजूद तेल की उपलब्धता और कीमतें भारत के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।

कुल मिलाकर, ट्रंप के फैसले से भारत को संभावित 100 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ के खतरे से तत्काल राहत मिली है। लेकिन यह छूट भविष्य में बदली जा सकती है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने जरूरत पड़ने पर दोबारा कार्रवाई करने का अधिकार अपने पास रखा है।

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