उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोहिया लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में माफिया का प्रभाव था, जबकि उनकी सरकार ने कानून के शासन यानी ‘रूल ऑफ लॉ’ को लागू करने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने कानून, न्याय और संविधान के महत्व पर जोर देते हुए विद्यार्थियों को अपने पेशेवर जीवन में इन मूल्यों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्रदेश में कानून-व्यवस्था के बदलाव का उल्लेख किया। उन्होंने पिछली सरकारों के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय कानून के बजाय माफिया का दबदबा होने की स्थिति थी। उनके अनुसार, वर्ष 2017 के बाद सरकार ने कानून का शासन स्थापित करने और व्यवस्था को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया। मुख्यमंत्री का यह बयान राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर उनकी सरकार के दावों के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
कानून के शासन पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून सर्वोपरि होना चाहिए। शासन और प्रशासन का संचालन संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होना जरूरी है। कानून का उद्देश्य केवल अपराध पर नियंत्रण करना नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना और समाज में न्याय सुनिश्चित करना भी है।
कानून की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, क्योंकि वे भविष्य में न्यायिक व्यवस्था, वकालत और प्रशासन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में संविधान की समझ, कानूनी प्रक्रियाओं का सम्मान और निष्पक्षता उनके पेशेवर जीवन के आवश्यक आधार हैं।
विद्यार्थियों से न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा
दीक्षांत समारोह किसी भी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा पूरी करने के साथ नई जिम्मेदारियों की शुरुआत का अवसर होता है। कानून विश्वविद्यालय के संदर्भ में इसका महत्व और बढ़ जाता है। यहां से निकलने वाले विद्यार्थी समाज में न्याय की पहुंच, नागरिक अधिकारों की रक्षा और कानूनी जागरूकता बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं।
मुख्यमंत्री के संबोधन का प्रमुख संदेश कानून के शासन और संस्थागत व्यवस्था की महत्ता से जुड़ा रहा। उन्होंने वर्ष 2017 से पहले और उसके बाद की स्थिति की तुलना करते हुए अपनी सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था में बदलाव का दावा किया।
हालांकि, कानून-व्यवस्था में सुधार का आकलन अपराध के आंकड़ों, न्यायिक प्रक्रिया, मामलों के निपटारे और नागरिकों के अधिकारों जैसे विभिन्न पहलुओं के आधार पर किया जाता है। मुख्यमंत्री का बयान इस विषय पर सरकार का दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।


